Technology News: आपने क्या कभी सोचा होगा कि आपके सामने खड़ा शख्स आपसे बात कर रहा है। लेकिन वह आपकी तस्वीरें लेकर आपकी बात रिकॉर्ड कर रहा है। यह सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। लेकिन यह सच है, क्योंकि META Glass का नया रेबन चश्मा इस समय विरोध के दायरे में खड़ा है। हैरानी वाली बात यह है कि बड़े-बड़े टेक इसका प्रचार करते नहीं थक रहे। जब्कि META Glass का नया रेबन चश्मा किसी के निजी जीवन व निजी बातों को रिकॉर्ड कर रहा है जो कानूनी तौर पर सही नहीं है।
AI स्मार्ट ग्लासेस की दुनिया में बड़ा कदम
आम तौर पर Meta और Ray-Ban ने एक साथ मिलकर AI स्मार्ट ग्लासेस की दुनिया में बड़ा कदम उठाया। दिखने बिलकुल आम चश्मे की तरह ही है। लेकिन उसके फिचर्स की बात की जाए तो इसमें एक कैमरा, माइक्रोफोन, स्पीकर और AI असिस्टेंट को इस तरह से लगाया गया है, जिसे देखने वाले को यह आम चश्मा ही लगेगा। इसे पहनने वाला बस एक कमांड देगा और एआई फोटो खींच जाएगी। इसके अलाव इसे पहने पहने ही आप वीडियो बना सकते हैं, गाना सुन सकते हैं और AI से अपना कोई भी सवाल पूछ सकते हैं।
कितना गलत है यह चश्मा?
Meta का Ray-Ban चश्मा जैसे ही लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसे ही आज लोगों ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। लेकिन आपको आज हम बताएंगे कि मेटा का यह रे-बेन चश्मा कितना मददगार और गलत है?
Meta का यह चश्मा कितना सही है?
टेक्नालॉजी की बात करें तो कुछ जगह यह चश्मा सही है। लेकिन किसी को बगैर बताए उसकी तस्वीरें ले लेना यह कानूनी तौर पर अपराध है Meta खुद भी यही मानता है कि, अगर आप फोन से तस्वीर नहीं ले रहे तो चश्में से भी नहीं ले। सीधा शब्दों में कहा जाए तो कंपनी खुद भी इसकी इजाजत नहीं देती।
लेकिन इस चश्में को बनाने में वह इसे लागू करना भूल गई। चश्मे में LED लाइट लगी है जो रिकॉर्डिंग के समय टिमटिमाएगी। अगर कोई इस लाइट को ढकता है या तोड़ता है तो कैमरा बंद हो जाता है। लेकिन क्या एक छोटी सी रोशनी काफी है? इसे लेकर ही विवाद है।
चश्मा चुपचाप खींचता है फोटो वह कितना गलत है?
क्योंकि इस चश्में को लगाने वाला शख्स आपकी तस्वीर को बगैर अनुमति लिए खींच रहा है। ऐसा करके वह आपकी प्राइवेसी में प्रवेश कर रहा है, जो पूरी तरह गलत है। जर्मन डिजिटल राइट्स ग्रुप HateAid ने Meta के खिलाफ क्रिमिनल कंप्लेंट दर्ज कराई है। क्योंकि इस पर लगी छोटी सी सफेद रोशनी हर कोने, दूरी या रोशनी में दिखाई नहीं देती.
हैंड्स-फ्री रिकॉर्डिंग: फोन निकालने की जरूरत नहीं। बटन दबाइए और फर्स्ट-पर्सन व्यू में फोटो/वीडियो आएगा। साइकिलिंग,कुकिंग,ट्रैवल जैसी एक्टिविटीज के लिए यह बेहद अच्छा है।
मेमोरी कैप्चर: 'सुपर सेंसिंग'मोड पर काम करता है। हर सेकंड ऑटो फोटो लेता रहेगा और AI पूरे दिन की विजुअल मेमोरी बनाता रहेगा मतलब फायदा देखा जाए तो आप कुछ भी नहीं भूल सकते।
कितना खतरनाक: फितना मतलब परीक्षण करना जो शांति भंग कर डर पैदा कर रहा है। ऐसे में Meta Glass आम लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।
प्राइवेसी खत्म: इलेक्ट्रानिक फ्रंटियर फाउंडेशन द्वारा जारी चेतावनी में कहा गया है कि, यह कैमरा किसी के फोन का पासवर्ड, बैंक का कार्ड नंबर या पर्सनल बातचीत भी कैप्चर कर सकता है। एक स्वीडिश जांच में पता चला कि केन्या में बैठे ठेका कर्मचारी यूजर्स के बाथरूम में न्यूडिटी की वीडियो देख रहा था। ऐसे में सोचिए की आपकी पर्सनल लाइफ की प्राइवेसी अन्य लोगों को भी मिल रही है।
महिलाओं के खिलाफ बड़ा हथियार: मेटा के चश्में का इस्तेमाल सबसे ज्यादा महिलाओं के लिए खतरनाक है। क्योंकि सड़क पर खड़ा अंजान शख्स कब आपकी तस्वीरें ले लेगा यह आपको पता भी नहीं लगेगा। बगैर आपको पता लगे रिकॉर्ड किया जा सकता है। HateAid की मैनेजिंग डायरेक्टर जोसेफीन बेलोन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, अब कोई स्थान नहीं जहां महिलाएं सुरक्षित हों।
स्कैम और ब्लैकमेल: महिला की तस्वीर लेकर आसानी से स्कैम किया जा सकता है। या फिर उन्हे ब्लैकमेल किया जा सकता है।
बगैर बताए हो जाएगी आपकी रिकॉर्डिंग
यह चश्मा अब महज गैजेट नहीं बल्कि कानूनी मुद्दा बन चुका है। क्योंकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह गैजेट आखिर लोगों की सुरक्षा के लिए कितना सही? ऐसे में यह कहना गलत भी नहीं होगा कि अगर इस चश्मे का इस्तेमाल लोग कर रहे हैं,तो क्या हम अब ऐसी दुनिया में रह रहे हैं। जहां सामने वाले को बगैर बताए और बगैर उसकी इजाजत के उसकी बाते रिकॉर्ड की जा रही हैं।
Meta Glass मददगार से ज्यादा खतरनाक
Meta के CTO एंड्रयू बोसवोर्थ का मानना है कि, लोगों का इसे 'परवर्ट' मान रहे हैं। ऐसे में बचाव का एक ही रास्ता है कि या तो कानून बने या फिर टेक्नोलॉजी में ही ऐसा डिजाइन हो कि बिना इजाजत रिकॉर्डिंग हो ही न सके. जब तक ऐसा नहीं होता, Meta Glass मददगार से ज्यादा खतरनाक ही साबित होगा।
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