Student Notice Case : सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में छात्रों के नोटिस जारी करने के मामले में जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा है कि जब रोक के बावजूद भी आखिर क्यों डीएम ने छात्रों को नोटिस भेजा? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस कार्रवाई को कोर्ट ने अवमानना मानते हुए डीएम से जवाब तलब किया है।
छात्र को भेजा था 5 लाख का नोटिस
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर नोएडा के छात्र अक्षत को दिल्ली पुलिस की ओर से 5 लाख रुपये का नोटिस दिए जाने का मामला सामने आया था। नोटिस में प्रदर्शन के दौरान कथित नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की बात कही गई थी। हालांकि, नोटिस जारी होने के दो दिन बाद ही इसे वापस ले लिया गया। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई और नोटिस की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीजेआई ने मांगा स्पष्टीकरण
मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सीजेआई ने मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। चीफ जस्टिस ने कहा कि, मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? हमने स्पष्ट किया था कि किसी भी स्टूडेंट के ख़िलाफ़ जबरन कोई कार्रवाई नहीं होगी। कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। कोर्ट ने छात्र को नोटिस जारी करने पर कड़ा ऐतराज जताया है। कोर्ट ने छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक लगाने के बावजूद नोटिस जारी करने परयह सवाल उठाया?
छात्रों पर सीधे तौर पर एक्सपेरिमेंट किया
सीजेपी ने कहा हमे हैरानी है कि जब साफ आदेश जारी किए गए थे, तो उनको कैसे नहीं माना गया। देश के छात्रों पर सीधे तौर पर एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है। क्योंकि अदालत के आदेश की अवमानना कर डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। लेकिन यह सही नहीं है।
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