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100 शब्द लिखने के लिए ChatGPT को चाहिए एक बोतल पानी! रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
AI का उपयोग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। ईमेल लिखने से लेकर स्कूल की पढ़ाई, ऑफिस के काम और कंटेंट क्रिएशन तक, लोग अब AI टूल्स पर पहले से कहीं अधिक निर्भर हो गए हैं।
AI का उपयोग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। ईमेल लिखने से लेकर स्कूल की पढ़ाई, ऑफिस के काम और कंटेंट क्रिएशन तक, लोग अब AI टूल्स पर पहले से कहीं अधिक निर्भर हो गए हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ChatGPT जैसे लोकप्रिय AI टूल को आपके सवालों का जवाब देने या सिर्फ 100 शब्द लिखने के लिए कितने संसाधनों की जरूरत पड़ती है? हाल ही में सामने आई एक रिसर्च ने इस विषय पर हैरान करने वाली जानकारी दी है।
100 शब्दों का टेक्स्ट लिखने में 519 मिलीलीटर पानी की आवश्यकता
अमेरिका की कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, रिवरसाइड के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, ChatGPT को लगभग 100 शब्दों का टेक्स्ट तैयार करने के लिए करीब 519 मिलीलीटर पानी की आवश्यकता पड़ सकती है। यह मात्रा लगभग एक सामान्य पानी की बोतल के बराबर है।
AI संचालन के दौरान पानी का क्या काम?
दरअसल, ChatGPT और अन्य बड़े AI मॉडल विशाल डेटा सेंटरों में मौजूद हजारों सर्वरों पर काम करते हैं। ये सर्वर लगातार भारी मात्रा में गणनाएं करते हैं, जिससे काफी गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी को नियंत्रित रखने के लिए डेटा सेंटरों में वाटर-बेस्ड कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि AI के संचालन के दौरान अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी मात्रा में पानी की खपत होती है।
AI सेवाओं की बढ़ती मांग से पानी की खपत बढ़ी
विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक की बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ डेटा सेंटरों की संख्या और उनका आकार भी तेजी से बढ़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियां अपने डेटा सेंटरों के संचालन के लिए अरबों गैलन पानी का उपयोग कर रही हैं। कई कंपनियों ने यह भी स्वीकार किया है कि AI सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण उनकी पानी की खपत में काफी बढ़ोतरी हुई है।
AI उपयोग से भविष्य में जल संकट
चिंता की बात यह है कि AI के लिए उपयोग किया जाने वाला पानी अक्सर उन क्षेत्रों से लिया जा रहा है, जहां पहले से ही जल संसाधनों पर दबाव है। मेक्सिको, चिली और अमेरिका के कुछ हिस्सों में स्थानीय समुदायों ने नए डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।
AI का विस्तार से 2027 तक स्थिति और गंभीर हो सकती है
रिसर्च में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि AI का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो वर्ष 2027 तक स्थिति और गंभीर हो सकती है। अनुमान है कि AI उद्योग की पानी की मांग ब्रिटेन द्वारा एक वर्ष में भूमिगत स्रोतों से निकाले जाने वाले पानी के लगभग आधे हिस्से के बराबर पहुंच सकती है। ऐसे में तकनीकी विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
Written By: Geeta Sharma
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