केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सुन्नी इस्लामी विद्वान कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने महिलाओं के घर के भीतर रहने की बात कही थी। सतीशन ने कहा कि महिलाओं को केवल घरेलू दायरे तक सीमित रखने वाली सोच केरलम की प्रगतिशील सामाजिक परंपरा के खिलाफ है। राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सतीशन ने कहा कि सरकार इस विचार से किसी भी स्तर पर सहमत नहीं है, उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की पूरी हकदार हैं और उन्हें सार्वजनिक जीवन से दूर रखना उचित नहीं है।

सीएम ने रानी बिलकिस का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने तर्क के समर्थन में इस्लामी इतिहास के उदाहरण भी दिए, उन्होंने रानी बिलकिस का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास में महिलाओं ने शासन और नेतृत्व की जिम्मेदारियां भी निभाई हैं। सतीशन ने कहा कि इस्लामी इतिहास में ऐसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जिन्होंने व्यापार किया, सैन्य नेतृत्व संभाला और राजसत्ता का संचालन किया, उन्होंने खलीफाओं के दौर की एक घटना का भी जिक्र किया। सतीशन के मुताबिक, उस समय एक महिला ने मेहर से संबंधित शासक के फैसले पर सवाल उठाया था और बाद में शासक ने उसके तर्क को सही माना। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये घटनाएं बताती हैं कि महिलाओं की सामाजिक और सार्वजनिक भूमिका को ऐतिहासिक रूप से भी स्वीकार किया गया है।

क्या कहा था कांथापुरम ने?

यह विवाद उस बयान के बाद शुरू हुआ, जो कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार ने रविवार को कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया था, उन्होंने कहा था कि महिलाओं को घर के भीतर रहना चाहिए और सार्वजनिक मंचों पर उनकी खुली भागीदारी समाज के लिए नुकसानदायक हो सकती है। कांथापुरम ने पर्दा और महिलाओं के घर में रहने की परंपरा को इस्लामी व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा था कि उनके संगठन के विद्वान पिछले करीब एक सदी से इसी विचार को आगे बढ़ाते रहे हैं, उनका दावा था कि इस परंपरा के कारण महिलाओं का सम्मान कायम रहा है, उन्होंने यह भी कहा था कि किसी संगठन या नेता के विरोध के बावजूद वह धार्मिक नियमों के आधार पर अपनी बात रखते रहेंगे और इस मामले में उन्हें कोई रोक नहीं सकता।

 

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