अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। मामले में SIT की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई स्थानीय अदालत में होगी। याचिकाकर्ताओं को ट्रायल में सहयोग करने की अनुमति भी दी गई है।
खबर के 5 अहम पॉइंट
- सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को मामले से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा किया।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि SIT चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
- जांच में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित हेराफेरी सामने आई।
- याचिकाकर्ताओं को अयोध्या की निचली अदालत में सुनवाई के दौरान सहयोग करने की अनुमति मिली।
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की सत्यता पर कोई राय नहीं दी है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दाखिल सभी याचिकाओं का निपटारा करते हुए निगरानी व सुनवाई बंद कर दी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) ने अयोध्या के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अयोध्या के न्यायिक मजिस्ट्रेट को नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई और ट्रायल चलाने का निर्देश दिया है।
सीसीटीवी में मिली तमाम जानकारी
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट देते हुए कहा कि वह ट्रायल के दौरान स्थानीय अदालत में शिकायतकर्ता या सहायक के तौर पर अपना मत रखा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उसने मामले के गुण-दोष पर किसी तरह की कोई राय नहीं दी है। मामले में लगाए गए तमाम आरोपों की सत्यता पर अब निचली अदालत फैसला लेगी। SIT की जांच में सीसीटीवी फुटेज को आधार बनाया गया था। जिसमें बगैर किसी की इजाजत के दान की नकदी निकालने के 105 मामले सामने आए। इससे 8 आरोपियों की भूमिका के बारे में जानकारी मिली है, साथ ही आरोपी के बैंक खातों व संपत्तियों में संदिग्ध निवेश मिले हैं।
वास्तविक कीमत 50 लाख
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान चोरी हुई थी। मामले में 35 दिनों की CCTV फुटेज उपलब्ध है। आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच की गई है। तुषार मेहता के मुताबिक जांच के दौरान कुछ आरोपियों द्वारा कथित चोरी की रकम से संपत्तियां खरीदने और निवेश करने के सबूत मिले हैं। तुषार मेहता ने उदाहरण देते हुए संपत्ति की रजिस्ट्री में दर्ज कीमत 15 लाख रुपये दिखाई।
जबकि उसकी वास्तविक कीमत 50 लाख थी। ऐसे में लगभग 35 लाख रुपये नकद दिए जाने की आशंका है। जांच एजेंसियों की माने तो संबंधित शख्स के पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं था। यह रकम कथित तौर पर चोरी के पैसों से आई। सॉलिसिटर जनरल का कहना है कि मामले में ऑडिट कराया गया है और चढ़ावे से जुड़ी सभी वस्तुएं तथा सबूत सुरक्षित हैं। जांच से संबंधित दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड पर भी रखे गए हैं।
अब निचली अदालत करेगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के यूपी सरकार की तरफ से दी गई जानकारी का हवाला दिया। मामले में फिलहाल चार्जशीट दायर की जा चुकी है। अब संबंधित निचली अदालत कानून के मुताबिक मामले का संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी है कि वे निचली अदालत के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। साथ ही, वे चाहें तो मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के तौर पर ट्रायल कोर्ट की सहायता भी कर सकते हैं।
राम जन्मभूमि की जमीन को लेकर याचिका
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इसमें जांच कराए जाने की मांग की गई थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण उसी स्थान पर हुआ है या नहीं इसे लेकर भी आदेश दिया था। इस पर अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को जमीन के रिकॉर्ड या संबंधित दस्तावेजों को लेकर कोई आपत्ति है तो वह इसके लिए सिविल कोर्ट का रुख कर सकता है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई निचली अदालत पर छोड़ दी है।
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