दीवाली का त्योहार खुशियों, रोशनी और अपनों के साथ मिलकर जश्न मनाने का पर्व है। इस पांच दिवसीय त्योहार की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका आखिरी दिन भाई दूज होता है। इन पांचों दिनों में घरों में दीपक जलाने की परंपरा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर हर दिन दीपक जलाने के पीछे क्या मान्यता है? दरअसल, हर दिन दीप जलाने का अपना अलग धार्मिक और पौराणिक महत्व बताया गया है। आइए आसान भाषा में जानते हैं कि धनतेरस से भाई दूज तक दीपक क्यों जलाए जाते हैं।
धनतेरस से भाई दूज तक दीपक जलाने की परंपरा
धनतेरस पर क्यों जलाते हैं दीपक?
धनतेरस से ही दीपावली के त्योहार की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन धन और सुख-समृद्धि के लिए भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, साथ ही घर की दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का डर दूर होता है। इसे यम दीपदान भी कहा जाता है।
छोटी दिवाली पर दीप जलाने का महत्व
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। कहा जाता है कि उन्होंने 16,100 महिलाओं को भी उसके बंधन से आजाद कराया था। इस खुशी में दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन जलने वाले दीप बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर रोशनी का संदेश देते हैं।
दिवाली पर क्यों जलाए जाते हैं सबसे ज्यादा दीपक?
दीपावली का त्योहार भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद जब प्रभु श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस आए, तो नगरवासियों ने उनका स्वागत दीप जलाकर किया था। तभी से दिवाली पर घरों को दीयों और रोशनी से सजाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन दीप जलाना सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी जीवन से नकारात्मकता और अज्ञानता को दूर करती है।
गोवर्धन पूजा पर दीपक जलाने की परंपरा
दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र देव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की सलाह दी थी। इससे नाराज होकर इंद्र देव ने तेज बारिश शुरू कर दी। तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसके बाद लोगों ने भगवान कृष्ण को 56 भोग अर्पित किए। इसी खुशी और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में इस दिन दीपक जलाए जाते हैं।
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भाई दूज पर दीप जलाने का क्या है कारण?
भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्यार और विश्वास को समर्पित होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुंचे थे। यमुना ने उनका स्वागत किया और तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। तभी से भाई दूज पर बहनों द्वारा भाइयों को तिलक लगाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन बहनें भाई की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए पूजा करती हैं। साथ ही दीपक जलाकर उनकी आरती भी उतारती हैं।