UP Online Fertilizer Booking: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खाद खरीदने का तरीका जल्द बदलने वाला है। अब यूरिया और डीएपी के लिए दुकानों या सहकारी समितियों पर लंबी लाइन लगाने की जरूरत कम हो सकती है। गैस सिलेंडर की तरह किसान मोबाइल से खाद की बुकिंग कर सकेंगे और बुकिंग के बाद 24 घंटे के भीतर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

इस नई व्यवस्था की शुरुआत फतेहपुर जिले से की जा रही है। इसके लिए खाद की दुकानों और सहकारी समितियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। अगले रबी सीजन से ऑनलाइन बुकिंग के जरिए खाद वितरण शुरू करने की तैयारी है।

मोबाइल पर दिखेगा खाद का स्टॉक

नई व्यवस्था में किसान FFC ऐप के जरिए अपने आसपास मौजूद खाद की दुकानों और सहकारी समितियों का स्टॉक देख सकेंगे।किसान को ऐप में अपनी जानकारी दर्ज करने के बाद लोकेशन चुननी होगी। इसके बाद उसके क्षेत्र में मौजूद खाद विक्रेताओं और समितियों की जानकारी सामने आएगी।जिस दुकान या समिति से खाद लेनी है, उसे चुनने पर वहां उपलब्ध यूरिया, डीएपी और दूसरी खाद का स्टॉक देखा जा सकेगा।इसके बाद किसान अपनी जरूरत के मुताबिक खाद की बोरी की संख्या बुक कर सकेगा।

बुकिंग के बाद बनेगा बारकोड

ऑनलाइन बुकिंग पूरी होने के बाद किसान के लिए बारकोड जनरेट होगा। इसी कोड के आधार पर खाद का वितरण किया जाएगा।किसान को संबंधित दुकान या सहकारी समिति पर जाकर यह बारकोड दिखाना होगा। इसके बाद बुक की गई खाद उपलब्ध कराई जाएगी।यानी किसान को पहले यह पता चल सकेगा कि जिस जगह से वह खाद लेना चाहता है, वहां स्टॉक मौजूद है या नहीं।

24 घंटे में खाद मिलने का दावा

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यही है कि बुकिंग के बाद 24 घंटे के भीतर खाद उपलब्ध कराने की योजना है।खाद की कीमत का भुगतान किसान ऑनलाइन बुकिंग के समय कर सकता है। अगर वह ऑनलाइन भुगतान नहीं करना चाहता तो खाद प्राप्त करते समय नकद भुगतान का विकल्प भी रखा गया है।हालांकि खबर में इसे गैस सिलेंडर की तरह होम डिलीवरी कहा गया है, लेकिन दिए गए विवरण में किसान को बुकिंग के बाद संबंधित दुकान या सहकारी समिति से खाद लेने की प्रक्रिया बताई गई है। इसलिए इसे फिलहाल मोबाइल से बुकिंग और तय केंद्र से त्वरित उपलब्धता के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा।

आधार से होगी पहचान, जमीन के हिसाब से तय होगी लिमिट

ऑनलाइन खाद बिक्री की व्यवस्था में किसान की पहचान आधार कार्ड के जरिए होगी। इसके साथ किसान की फार्मर रजिस्ट्री से उसकी जमीन की जानकारी भी जुड़ी होगी।यही जानकारी यह तय करने में मदद करेगी कि किसान कितनी मात्रा में खाद खरीद सकता है।इसका मकसद खाद की बिक्री को जमीन और फसल की जरूरत से जोड़ना है, ताकि उपलब्ध खाद का वितरण ज्यादा व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।

फार्मर रजिस्ट्री में जमीन के सभी गाटे जुड़ना जरूरी

किसानों के लिए यहां एक जरूरी बात है। केवल फार्मर रजिस्ट्री होना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसमें जमीन के सभी संबंधित गाटे लिंक होना भी जरूरी है।मान लीजिए किसी किसान की कुल जमीन ज्यादा है, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री में उसके कुछ गाटे दर्ज नहीं हैं। ऐसी स्थिति में खाद की खरीद की सीमा लिंक जमीन के आधार पर तय हो सकती है।इसलिए जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में जमीन का कोई गाटा छूट गया है, उन्हें उसे दोबारा अपडेट कराना चाहिए।फतेहपुर में करीब 95 प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होने की जानकारी दी गई है। अब बाकी किसानों के साथ-साथ अधूरी रजिस्ट्री को भी पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है।

FFC ऐप पर ऐसे करनी होगी खाद की बुकिंग

नई व्यवस्था शुरू होने के बाद किसान इस तरह खाद बुक कर सकेंगे

1. ऐप डाउनलोड करें:
Google Play Store से FFC ऐप डाउनलोड करना होगा।

2. जानकारी दर्ज करें:
ऐप में नाम और आधार नंबर जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी।

3. लोकेशन चुनें:
अपना क्षेत्र चुनने के बाद आसपास की खाद की दुकानें और सहकारी समितियां दिखाई देंगी।

4. स्टॉक देखें:
जिस दुकान या समिति से खाद लेना है, उसे चुनकर वहां उपलब्ध स्टॉक देखा जा सकेगा।

5. अपना कोटा देखें:
सिस्टम किसान की जमीन के आधार पर उपलब्ध खरीद सीमा दिखाएगा।

6. खाद की मात्रा चुनें:
किसान अपनी जरूरत के हिसाब से यूरिया, डीएपी या उपलब्ध खाद की बोरी की संख्या दर्ज करेगा।

7. बारकोड दिखाकर खाद लें:
बुकिंग के बाद बारकोड बनेगा। संबंधित केंद्र पर इसे दिखाकर खाद प्राप्त की जा सकेगी।

फतेहपुर में पांच लाख किसानों को मिलेगा फायदा

फतेहपुर जिले में करीब पांच लाख किसान ऐसे हैं जिनके नाम जमीन दर्ज है। खरीफ, रबी और जायद सीजन में किसान अलग-अलग फसलों के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरक का इस्तेमाल करते हैं।खाद की बिक्री को लेकर किसानों की सबसे बड़ी परेशानी स्टॉक और उपलब्धता से जुड़ी रहती है। नई व्यवस्था में मोबाइल पर स्टॉक की जानकारी मिलने से किसान को अलग-अलग दुकानों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड रहने से खाद वितरण की निगरानी भी आसान होने की उम्मीद है।

किसानों को भी दी जाएगी ऐप की ट्रेनिंग

इस व्यवस्था को जमीन पर लागू करने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारत सरकार की ओर से जिले में 26 मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी गई है।इसके बाद ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण शिविर लगाकर किसानों को भी ऐप के इस्तेमाल की जानकारी देने की तैयारी है।जिला कृषि अधिकारी नरोत्तम सिंह के मुताबिक, खरीफ सीजन खत्म होने के बाद अगले रबी सीजन से ऑनलाइन बुकिंग के जरिए खाद वितरण शुरू करने की योजना है।