UP North-South Corridor: उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में करीब 600 किलोमीटर लंबे नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर काम आगे बढ़ रहा है। बरेली से शुरू होकर ललितपुर तक जाने वाला यह कॉरिडोर यूपी के रुहेलखंड, पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड को आपस में जोड़ेगा। इसके साथ ही कई बड़े एक्सप्रेसवे और हाईवे भी इससे कनेक्ट होंगे।
इस परियोजना का मकसद सिर्फ दो शहरों के बीच सफर कम करना नहीं है। कॉरिडोर के जरिए रास्ते में आने वाले कई जिलों की कनेक्टिविटी को बेहतर करने की योजना है। शहरों में ट्रैफिक से बचाने के लिए कई जगह बाईपास और फ्लाईओवर भी प्रस्तावित हैं।
बरेली से ललितपुर तक किन जिलों से गुजरेगा कॉरिडोर?
नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को बरेली से ललितपुर तक विकसित किया जा रहा है। इसके रास्ते में बदायूं, कासगंज, एटा, हाथरस, आगरा और झांसी जैसे प्रमुख जिले आएंगे।यानी यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से को सीधे बुंदेलखंड तक जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। ललितपुर के रास्ते इसकी कनेक्टिविटी मध्य प्रदेश की तरफ भी बेहतर होगी। यह कोई एक नई सड़क नहीं होगी, बल्कि मौजूदा सड़कों और मार्गों को अपग्रेड करने के साथ कई हिस्सों में नए निर्माण का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। यूपी सरकार ने इस परियोजना को फरवरी में मंजूरी दी थी।
बरेली से आगरा और झांसी का सफर होगा काफी छोटा
कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा लंबी दूरी के यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। मौजूदा सड़क मार्ग से बरेली से आगरा पहुंचने में करीब 6 घंटे तक लग सकते हैं। कॉरिडोर तैयार होने के बाद यह सफर लगभग 4 घंटे में पूरा होने का अनुमान है।इसी तरह बरेली से झांसी जाने में अभी करीब 10 से 11 घंटे तक लग जाते हैं। नई कनेक्टिविटी बनने के बाद यह दूरी लगभग 5 घंटे में पूरी हो सकेगी।वहीं बरेली से ललितपुर पहुंचने में फिलहाल करीब 12 घंटे तक का समय लग सकता है। प्रस्तावित कॉरिडोर के बाद यह सफर करीब 6 से साढ़े 6 घंटे में पूरा होने का अनुमान है।
7 बड़े एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर
इस कॉरिडोर की खासियत यह है कि यह यूपी के कई प्रमुख एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इससे अलग-अलग इलाकों से आने वाले वाहनों को लंबी दूरी तय करने के लिए बार-बार शहरों के भीतर जाने की जरूरत कम होगी।बरेली, बदायूं, कासगंज और ललितपुर जैसे इलाकों को इससे बेहतर हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। कॉरिडोर की कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत कुल 7 प्रमुख एक्सप्रेसवे से जोड़े जाने की योजना है।
दिल्ली-NCR और नोएडा तक पहुंचना भी होगा आसान
इस कॉरिडोर का फायदा सिर्फ यूपी के शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। बरेली, बदायूं और आसपास के इलाकों से दिल्ली-NCR की तरफ जाने वाले लोगों को भी वैकल्पिक और तेज रूट मिल सकता है।बदायूं के आसपास गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद दिल्ली-NCR की ओर जाना आसान होगा। वहीं बरेली-मथुरा मार्ग के जरिए यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ने पर नोएडा और दिल्ली की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी फायदा मिल सकता है।इससे पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के बीच सामान की आवाजाही भी तेज होने की उम्मीद है।
उत्तराखंड जाने वालों के लिए भी बन सकता है बेहतर रूट
कॉरिडोर का असर सिर्फ दिल्ली और लखनऊ की कनेक्टिविटी तक नहीं रहेगा। झांसी और ललितपुर जैसे बुंदेलखंड के जिलों से बरेली तक पहुंच आसान होने पर आगे उत्तराखंड की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी फायदा मिल सकता है।बरेली से उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की ओर पहले से मौजूद मार्गों और प्रस्तावित कनेक्टिविटी को देखते हुए भविष्य में नैनीताल, रुद्रपुर और आसपास के इलाकों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। वहीं गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तार देने की योजना के साथ यह नेटवर्क और बड़ा हो सकता है।
क्या बदलेगा?
नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के पूरा होने के बाद यूपी के कई हिस्सों के बीच यात्रा का समय घटने के साथ एक्सप्रेसवे नेटवर्क की आपसी कनेक्टिविटी मजबूत होगी। खासकर रुहेलखंड से आगरा, झांसी और बुंदेलखंड तक जाने वाले यात्रियों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।