कानपुर: गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र और सर्वोदय मंडल की ओर से संत एवं गांधीवादी विचारक आचार्य विनोबा भावे की 131वीं जयंती हरिहरनाथ शास्त्री भवन, खलासी लाइन में मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विनोबा भावे के जीवन और उनके भूदान आंदोलन में योगदान को याद किया।

विनोबा भावे का जीवन देश के लिए समर्पित रहा

कार्यक्रम की अध्यक्षता गांधीवादी जगदंबा भाई ने की। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे का जीवन देश की गरीब और कमजोर जनता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने भूदान यज्ञ के लिए देशभर में लगातार पदयात्रा की और लोगों से अपनी जमीन का कुछ हिस्सा भूमिहीनों को दान करने की अपील की।

वक्ताओं के अनुसार, विनोबा भावे की पदयात्रा के दौरान करीब 42 लाख एकड़ भूमि दान में मिली थी, जिसमें से लगभग 15 लाख एकड़ भूमि तत्काल भूमिहीनों को आवंटित की गई। इसका उद्देश्य भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के अवसर पैदा करना था।

कानपुर से रहा आचार्य विनोबा भावे का विशेष लगाव  

वक्ताओं ने बताया कि कानपुर से भी आचार्य विनोबा भावे का विशेष लगाव था। कानपुर के गांवों के दौरे के दौरान उन्हें बड़ी मात्रा में भूमि भूदान में मिली, जिसे गरीबों में बांटने का प्रयास किया गया।

उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग महासंघ के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कहा कि विनोबा भावे को वर्ष 1958 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें वर्ष 1981 में मरणोपरांत भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन से मिलकर बिल्हौर, नरवल और सदर तहसील में भूदान के तहत मिली जमीनों को चिन्हित कर गरीबों को उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। साथ ही इन जमीनों पर छुट्टा गोवंश के लिए चारागाह और संरक्षण गृह बनाए जाने की मांग भी रखी जाएगी।

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