Land Scam Case: पश्चिम बंगाल में कथित जमीन घोटाले से जुड़े मामले में राज्य CID ने गुरुवार को TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) सुमित रॉय को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा रॉय को एंटीसिपेटरी बेल देने से इनकार किए जाने के कुछ ही समय बाद हुई।

रिपोर्टों के मुताबिक, CID की कार्रवाई झारग्राम में कथित जमीन घोटाले की जांच के सिलसिले में की गई है। गिरफ्तारी के बाद अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर सुरक्षा कर्मियों और मीडिया की भीड़ देखी गई।

विधानसभा में सुवेंदु अधिकारी का दावा

पश्चिम बंगाल विधानसभा में बोलते हुए भाजपा नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने रॉय की गिरफ्तारी को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा हटाए जाने के बाद CID ने सुमित रॉय को 121, कालीघाट रोड स्थित TMC कार्यालय से गिरफ्तार किया। अधिकारी ने विधानसभा में कहा, सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा हटाए जाने के बाद CID ने सुमित रॉय को 121 कालीघाट रोड पर तृणमूल कांग्रेस के ऑफिस से गिरफ्तार किया है।

उन्होंने रॉय पर अभिषेक बनर्जी की ओर से कथित तौर पर पैसे इकट्ठा करने का भी आरोप लगाया। अधिकारी ने उन्हें 'टोला भतीजा' का 'नंबर वन कलेक्टर' बताया। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।

जून में जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट

मामले में पश्चिम मेदिनीपुर जिले की एक अदालत ने 15 जून को सुमित रॉय के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद रॉय ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले कलकत्ता हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

ये भी पढ़ें: दिल्ली में बनेगी State Disaster Emergency Relief Force! CM रेखा गुप्ता का बड़ा कदम

6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने रॉय को स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल करने की अनुमति दी थी और अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। हालांकि, गुरुवार को अदालत द्वारा एंटीसिपेटरी बेल से राहत नहीं मिलने के बाद CID ने उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

झारग्राम जमीन मामले की जांच जारी

सुमित रॉय की गिरफ्तारी झारग्राम में कथित जमीन घोटाले की जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है। अब जांच एजेंसी रॉय से कथित लेन-देन और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ कर सकती है।

मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज होने की संभावना है। हालांकि,जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। मामले में CID की आगे की कार्रवाई और अदालत में होने वाली सुनवाई पर अब नजर रहेगी।