Sujanbadarganj Aligarh Third Railway Line: उत्तर प्रदेश के रेल नेटवर्क के लिए गुरुवार का दिन अहम रहा। केंद्र सरकार ने हावड़ा-दिल्ली रेल रूट पर क्षमता बढ़ाने वाली कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें सूबेदारगंज से अलीगढ़ के दाऊद खां स्टेशन तक तीसरी रेल लाइन बिछाने की योजना भी शामिल है।
यह नई लाइन कानपुर सेंट्रल और इटावा होते हुए अलीगढ़ तक जाएगी। इसके साथ ही सूबेदारगंज से मुगलसराय के बीच तीसरी रेल लाइन को भी स्वीकृति मिल गई है। दूसरी तरफ सूबेदारगंज से प्रयागराज तक चौथी रेल लाइन का काम पहले से आगे बढ़ रहा है।रेलवे के लिहाज से इन परियोजनाओं का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि दिल्ली-हावड़ा देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है। अतिरिक्त ट्रैक बनने से इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध हो सकेगी।
सूबेदारगंज से अलीगढ़ तक तीसरी लाइन का रास्ता क्या होगा?
प्रस्तावित तीसरी रेल लाइन सूबेदारगंज से शुरू होकर कानपुर सेंट्रल और इटावा होते हुए अलीगढ़ के दाऊद खां स्टेशन तक पहुंचेगी।यानी इस परियोजना से प्रयागराज क्षेत्र को कानपुर और आगे अलीगढ़ की दिशा में जाने वाले रेल नेटवर्क में अतिरिक्त ट्रैक मिलेगा। फिलहाल दिल्ली-हावड़ा रूट पर यात्री और मालगाड़ी दोनों तरह की ट्रेनों का दबाव रहता है। ऐसे में अतिरिक्त लाइन से संचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
प्रयागराज-मुगलसराय सेक्शन को भी मिली हरी झंडी
रेलवे के लिए दूसरी बड़ी खबर सूबेदारगंज से मुगलसराय तक तीसरी लाइन की मंजूरी है। इस रूट पर अतिरिक्त ट्रैक बनने से प्रयागराज क्षेत्र से पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरफ रेल संचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।प्रयागराज से मुगलसराय का रेल सेक्शन पूर्वी भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है। अतिरिक्त लाइन होने पर मौजूदा ट्रैक पर ट्रेनों के दबाव को बेहतर तरीके से संभालने की गुंजाइश बनेगी।
सूबेदारगंज से प्रयागराज तक चौथी लाइन का काम भी जारी
इसी नेटवर्क में सूबेदारगंज से प्रयागराज तक चौथी रेल लाइन का काम भी चल रहा है। यानी प्रयागराज क्षेत्र में एक साथ अलग-अलग सेक्शन की रेल क्षमता बढ़ाने पर काम हो रहा है।तीसरी और चौथी लाइन जैसी परियोजनाओं का सीधा उद्देश्य सिर्फ नई पटरी बिछाना नहीं होता, बल्कि मौजूदा रेल नेटवर्क को मल्टी-ट्रैक बनाकर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना भी है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
अतिरिक्त रेल लाइन बनने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि एक ही ट्रैक पर ट्रेनों को एक-दूसरे के पीछे चलाने की मजबूरी कम होती है। इससे रेलवे को यात्री और मालगाड़ियों के संचालन को अधिक व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिल सकती है।लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए भी इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि किसी ट्रेन के समय में कितनी कमी आएगी या कितनी नई ट्रेनें चलेंगी, यह परियोजना पूरी होने और रेलवे के परिचालन प्लान पर निर्भर करेगा।
मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए भी अहम
दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर केवल यात्री ट्रेनों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। इस रूट पर बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी चलती हैं। अतिरिक्त लाइन बनने से माल ढुलाई के लिए उपलब्ध रेल क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।इसका फायदा औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों तक माल पहुंचाने में भी हो सकता है। खासकर कानपुर, इटावा, प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों के लिए बेहतर रेल क्षमता लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत कर सकती है।
तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने कुल तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें सूबेदारगंज-अलीगढ़ तीसरी लाइन और सूबेदारगंज-मुगलसराय तीसरी लाइन से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।उत्तर-मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने भी सूबेदारगंज-मुगलसराय तीसरी रेल लाइन को मंजूरी मिलने की जानकारी दी है।रेलवे के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त कॉरिडोर पर भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को देखते हुए पहले से अतिरिक्त क्षमता तैयार की जा रही है।
क्यों खास है दिल्ली-हावड़ा रेल रूट?
दिल्ली और हावड़ा को जोड़ने वाला रेल कॉरिडोर उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच यात्रियों तथा माल की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। इस पर ट्रेनों की संख्या ज्यादा होने के कारण ट्रैक की क्षमता का लगातार इस्तेमाल होता है।ऐसे में तीसरी और चौथी लाइन जैसी परियोजनाएं नेटवर्क को विस्तार देने के साथ-साथ भविष्य में बढ़ने वाले रेल यातायात को संभालने के लिए भी अहम मानी जा रही हैं।