AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी और संघ परिवार से जुड़े कुछ लोग फॉर्म-7 का इस्तेमाल कर मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

ओवैसी ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाया सवाल

ओवैसी के मुताबिक कुछ इलाकों में पहले से भरे हुए फॉर्म-7 जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन फॉर्म में उस मतदाता का नाम दर्ज है, जिसे वोटर लिस्ट से हटाने का अनुरोध किया गया है, लेकिन शिकायत या आवेदन करने वाले व्यक्ति की पहचान और जरूरी विवरण मौजूद नहीं हैं। ओवैसी ने कहा कि यदि इस तरह फॉर्म जमा किए जा रहे हैं तो यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

चुनाव अधिकारियों से कार्रवाई की मांग

AIMIM प्रमुख ने कहा कि उन्होंने इस मामले को चुनाव आयोग के संज्ञान में लाने की बात कही है। इसके साथ ही तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी इसकी जानकारी देने की बात कही। ओवैसी का कहना है कि यदि जांच में फर्जी या नियमों के खिलाफ फॉर्म-7 दाखिल किए जाने की पुष्टि होती है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मतदाता सूची से नाम हटाने की ऐसी गतिविधियां जारी रहीं तो उनकी पार्टी इस मुद्दे पर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। ओवैसी ने कहा कि हैदराबाद में ऐसा प्रदर्शन हो सकता है, जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों से भी बड़ा होगा, उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे को लेकर AIMIM चुप नहीं बैठेगी।

वोटर लिस्ट में नाम हटाने की प्रक्रिया पर निगरानी की अपील

ओवैसी ने निर्वाचन आयोग और राज्य के चुनाव अधिकारियों से अपील की कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आने वाले आवेदनों की उचित जांच की जाए, उन्होंने विशेष रूप से फॉर्म-7 के जरिए किए जा रहे दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाने की मांग की, ताकि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटाया जा सके।

यूपी चुनाव को लेकर गठबंधन के संकेत

इस बीच उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी ओवैसी ने अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया है, उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव से पहले दूसरे राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है। ओवैसी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता उत्तर प्रदेश में बीजेपी को लगातार तीसरी बार सरकार बनाने से रोकना है।

उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उनकी पार्टी के चार विधायक दूसरी पार्टी में चले गए थे, तब AIMIM ने सीमित सीटों की मांग की थी, लेकिन उसे अपेक्षित राजनीतिक समर्थन नहीं मिला। ओवैसी ने कहा कि इसके बावजूद उनकी पार्टी ने दोबारा चुनाव लड़ा और जनता के समर्थन से पांच सीटें जीतने में सफल रही।

ओवैसी ने केंद्र सरकार की समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी आरोप लगाया, उनका दावा है कि UCC लागू करने की कवायद के पीछे देश को हिंदू राष्ट्र की दिशा में ले जाने की कोशिश है।

 

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