सारण: बिहार के सारण जिले के अमनौर में बाढ़ राहत राशि के वितरण को लेकर मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। सरकारी सहायता से वंचित रहने से नाराज भसतपुर और अमनौर कल्याण पंचायत के सैकड़ों महिला-पुरुष प्रखंड मुख्यालय पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाया।

बाढ़ में उजड़ गए घर, लेकिन सरकारी राहत से रह गए वंचित

दरअसल, सारण तटबंध टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने इलाके के कई परिवारों को प्रभावित किया था। बाढ़ के पानी से लोगों के घरों और रोजमर्रा की जिंदगी को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद बिहार सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को 7-7 हजार रुपये की जीआर सहायता राशि देने की घोषणा की गई थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी घोषणा के बावजूद वास्तविक बाढ़ पीड़ितों को अब तक सहायता नहीं मिली है।

जिनके घर डूबे, उन्हें नहीं मिले पैसे; अपात्रों को भुगतान का आरोप

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और वार्ड स्तर पर राहत राशि के वितरण में मनमानी की गई है। कुछ चुनिंदा लोगों के खातों में ही 7 हजार रुपये भेजे गए, जबकि कई वास्तविक पीड़ित परिवारों के नाम लाभार्थियों की सूची से गायब हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाढ़ से प्रभावित नहीं होने वाले कुछ लोगों के खातों में भी सरकारी सहायता पहुंच गई। प्रदर्शनकारियों ने बिचौलियों के माध्यम से कथित गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

आश्वासन से नाराज ग्रामीणों का धरना, भुगतान की समय-सीमा बताने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि राहत राशि में गड़बड़ी को लेकर वे कई बार अंचलाधिकारी और प्रखंड कार्यालय में शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिला है। इसी से नाराज होकर मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंच गए।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जीआर सहायता राशि के वितरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन परिवारों को वास्तव में बाढ़ से नुकसान हुआ है, उनके खातों में जल्द से जल्द 7 हजार रुपये भेजे जाएं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमनौर के सीओ और बीडीओ मौके पर पहुंचकर उनकी बात नहीं सुनते और भुगतान की समय-सीमा तय नहीं करते, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

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