पटना: बिहार में बाढ़ की वजह से जहां चारों तरफ अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है तो वही अब इस बीच निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी राहत और बचाव कार्यो को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गम्भीर सवाल उठाए है। छपरा के अपने दौरे पर उन्होंने बाढ़ प्रभावित कई इलाकों का जायजा लिया और दावा किया कि अभी भी कई जगहों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार के लिए ₹5,000 करोड़ की राहत सहायता देने की मांग की।

100 हैंडपंप और 50 से अधिक जनरेटर की कराई व्यवस्था

पप्पू यादव ने कहा कि वह पिछले तीन दिनों से छपरा में हैं। उनके मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनरेटर, पॉलीथिन शीट, सामुदायिक रसोई, मेडिकल सुविधाएं और हैंडपंप जैसी जरूरी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं थीं। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से करीब 100 हैंडपंप और 50 से अधिक जनरेटर की व्यवस्था कराई गई। साथ ही प्रभावित लोगों के लिए बाथरूम और पॉलीथिन शीट की भी व्यवस्था की गई।

उठाए सवाल कहा,“Why such hatred towards Biharis?”

उन्होंने राहत कार्यों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि बाढ़ के दौरान सांसद और विधायक कहां हैं। दूसरे राज्यों में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि असम, पंजाब और गुजरात में संकट के समय सरकार और स्थानीय लोगों ने मदद के लिए कदम उठाए, लेकिन बिहार में ऐसा क्यों नहीं हो रहा। इसी दौरान उन्होंने सवाल किया, “Why such hatred towards Biharis?”

पप्पू यादव ने सिंचाई कार्यों से जुड़े ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने श्रीराम कंस्ट्रक्शन को ब्लैकलिस्ट करने, सिंचाई मंत्री से जुड़े ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सिंचाई मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

सम्राट चौधरी ने की बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद 

वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सारण जिले के बाढ़ प्रभावित और सड़क संपर्क से कटे इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए 15 sorties में 28 टन से अधिक खाद्य सामग्री और 5,600 से ज्यादा सूखा राशन पैकेट प्रभावित क्षेत्रों में गिराए गए हैं। राहत अभियान में केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के साथ भारतीय वायुसेना भी शामिल है।

बिहार में बाढ़ राहत को लेकर पप्पू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने बिहार के लिए ₹5,000 करोड़ की सहायता और प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।

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