MPSC Protest: देश में इस समय युवा सड़कों पर उतरा हुआ है। देश के अलग-अलग कौने में अपनी मांगों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते हुए युवा दिखाई दे रही हैं। राजधानी दिल्ली में जहां कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा SIR का विरोध प्रदर्शन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए शनिवार को विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। तो वहीं आज भी कांग्रेस की तरफ से विरोध मार्च का आह्वान किया गया है।
आज महाराष्ट्र के पुणे में एसपीएससी पेपर लीक मामले में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन स्थगित कर दिया है। महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर पिछले 10 दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन आखिरकार रविवार की देर रात खत्म हो चुका है। राज्य सरकार ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों पर विचार करते हुए मामले की जांच के लिए समिति गठित करने का विचार किया है। MPSC के अध्यक्ष को छुट्टी पर भेज दिया गया है।
10 दिन बार आंदोलन खत्म
MPSC की पढ़ाई करने वाले हज़ारों छात्र पेपर लीक के बाद आंदोलन पर बैठे थे। लगातार 10 दिन छात्रों के इस आंदोलन को सफलता मिल चुकी है। सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को कथित पेपर लीक मामले की जांच पूरी होने तक अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया है।
यह फैसला पुणे में उम्मीदवारों द्वारा उनके इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए 10 दिवसीय विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन अस्थाई रूप से वापस ले लिया है। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों से बातचीत की। उन्होंने एलान कर आंदोलन के संबंधन मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
होगी न्यायिक जांच
एमपीएससी के उम्मीदवारों के साथ हुई बैठक में महाराष्ट्र के मंत्री शिवेंद्रराजे भोंसले ने एमपीएससी के संबंध में एक सकारात्मक रुख स्थापित करने की बात कही। समिति को केवल कुछ तकनीकी कार्यों में बदलाव करने की जरूरत है। उन्होंने बदलाव तैयार कर उन्हें जल्द ही पेश करने की बात कही है। इससे पहले, X पर एक पोस्ट में भीमनवार ने लिखा था, राज्य सरकार ने एमपीएससी पेपर लीक मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की है।
मैंने अपने पूरे जीवन में नैतिकता को प्राथमिकता दी है। इसलिए, मैंने इस जांच के पूरा होने तक पद पर बने रहने के बजाय इस अवधि के दौरान अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है। एमपीएससी के छात्रों की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और हित हमेशा से मेरी प्राथमिकता रहे हैं, और भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा।
जांच पूरी होने तक दी लंबी छुट्टी
सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को एमपीएससी से संबंधित मामले की जांच के लिए गठित समिति का सचिव भी नियुक्त किया है। हालांकि छात्रों ने भीमनवार के इस्तीफे की मांग की थी, लेकिन सरकार द्वारा जांच पूरी होने तक उन्हें कार्यालय से दूर रखने का फैसला लिया है। उनके इस्तीफे की मांग चर्चाओं के दौरान विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बनी रही। लेकिन मुद्दा यह है कि आखिर जांच कब तक पूरी होगी। क्योंकि अभ्यर्थियों को भविष्य इसे लेकर कहीं अधर में न लटक जाए।
22 मार्च को आयोजित हुई थी परीक्षा
एमपीएससी ने 22 मार्च को आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत के बाद प्रारंभिक जांच शुरू की थी। 29 जुलाई 2025 को आयोग ने ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया था। स्क्रीनिंग परीक्षा 22 मार्च को महाराष्ट्र के 6 संभागीय मुख्यालयों में ऑफलाइन आयोजित हुई थी। जिसका परिणाम 12 जून को घोषित किया गया था।
प्रारंभिक जांच के बाद, 506 उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए योग्य पाए गए। इनमें से 488 उम्मीदवारों के साक्षात्कार 1 जुलाई से 22 जुलाई के बीच आयोजित किए गए। साक्षात्कारों के पूरा होने के बाद आयोग ने 488 उम्मीदवारों की एक अनंतिम सामान्य योग्यता सूची प्रकाशित की, जिसमें 485 योग्य और तीन अयोग्य उम्मीदवार शामिल थे।
पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द
इसी बीच 22 जुलाई से 26 जुलाई के बीच आयोग को उम्मीदवारों और जन प्रतिनिधियों से ईमेल के माध्यम से शिकायतें प्राप्त हुईं। जिनमें 22 मार्च को आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में कदाचार का आरोप लगाया गया था। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ उम्मीदवारों को 20 मार्च को परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र या प्रश्न प्राप्त हो गए थे, और बाद में इन्हें सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया गया था। परीक्षा में अनियमितताओं के मद्देनजर एमपीएससी ने इस पद के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी है।
क्या प्रदर्शन ही एक मात्र जरिया है?
यहां बड़ी बात यह है कि देश में बिना नेशनल मीडिया कवरेज के भी छात्रों ने यह आंदोलन जारी रखा। जहां दिल्ली में कई बड़े नेताओं ने प्रदर्शन में अपना योगदान दिया। तो महाराष्ट्र में युथ अकेले ही अपने अधिकार की लड़ाई लड़ता दिखा। कहते हैं कि चिंगारी को हवा मिलते ही कब भंयकर आग लग जाए यह किसी को नहीं बता। ऐसा ही कुछ देश में बीते दिनों दिखाई दिया।
दिल्ली में पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और अब SIR का विरोध करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके साथ ही पूर्व में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार में भी देश का युवा अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए सड़क पर उतरा। लेकिन सवाल यह है कि क्या देश में अब अपनी विरोध प्रदर्शन ही क्या एकमात्र जरिया है सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का?
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