Shaktipeeth Expressway: आज कल जहां एक जगह से दुसरे जगह जाना बेहद आसान हो गया है तो वही अब महाराष्ट्र में एक ऐसा एक्सप्रेस बने जा रहा है जो कई बड़े तीर्थ स्थलों सहित 13 जिलों से होकर गुजरेगा। महाराष्ट्र शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे सिर्फ तेज सफर का जरिया नहीं होगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिए भी बड़ा कॉरिडोर साबित होगा। हालांकि संशोधित रूट के मुताबिक करीब 856 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 13 जिलों से होकर गुजरेगा। खास बात यह है कि इसके रूट से महाराष्ट्र के करीब 21 प्रमुख धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
21 धार्मिक स्थलों तक पहुंचेगा रास्ता
शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से खास बनाने वाली बात इसका रूट है। इसके जरिए महाराष्ट्र के कई प्रसिद्ध मंदिरों और तीर्थस्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इनमें माहूर की रेणुका देवी, तुलजापुर की तुलजा भवानी और कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा औंढा नागनाथ और परली वैजनाथ जैसे ज्योतिर्लिंग, पंढरपुर का विठोबा मंदिर और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल भी इस कॉरिडोर से बेहतर तरीके से जुड़ेंगे।
856 किमी लंबा होगा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे की लंबाई संशोधित अलाइनमेंट के बाद करीब 856 किलोमीटर बताई जा रही है। शुरुआती योजना में इसका रूट करीब 802 किलोमीटर का था, लेकिन बदलाव के बाद इसकी लंबाई 856 किलोमीटर बढ़ाई गई हैं। यह एक्सप्रेसवे पवनार, वर्धा से शुरू होकर महाराष्ट्र-गोवा सीमा पर पत्रादेवी तक जा सकती है। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
13 जिलों से होकर गुजरेगा रास्ता
नए रूट के मुताबिक यह एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र के 13 जिलों से जुड़ेगा। साथ ही इसका असर विदर्भ से लेकर मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र तक दिखाई देगा। इससे इन क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है।
ज्योतिर्लिंग और शक्तिस्थलों तक आसान होगी यात्रा
इस परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण धार्मिक कनेक्टिविटी है। जिसमें औंढा नागनाथ और परली वैजनाथ जैसे ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ महाराष्ट्र के प्रमुख शक्तिस्थलों को भी बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा। श्रद्धालुओं के लिए इसका मतलब यह है कि अलग-अलग शहरों से आने वाले लोग एक ही यात्रा में महाराष्ट्र के कई प्रमुख तीर्थस्थलों को आसानी से कर सकेंगे।
नागपुर से गोवा के बीच बेहतर कनेक्टिविटी
शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक स्थलों को जोड़ना नहीं है। बल्कि यह नागपुर और गोवा के बीच सड़क संपर्क विकसित करने की बड़ी परियोजना भी है। वहीं एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद विदर्भ, मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और कोंकण के बीच यात्रा आसान होने की उम्मीद है। इससे माल ढुलाई और व्यापार को भी फायदा मिल सकता है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया बूस्ट
महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रमुख मंदिरों और तीर्थस्थलों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन स्थानों तक बेहतर कनेक्टिविटी बनने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। यानी शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे आने वाले समय में सिर्फ 856 किलोमीटर लंबी सड़क नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के कई बड़े तीर्थस्थलों को जोड़ने वाला धार्मिक और आर्थिक कॉरिडोर बन सकता है।
मुख्य धार्मिक स्थल हैं शामिल
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका धार्मिक महत्व है। इसके जरिए माहूर की रेणुका माता, तुलजापुर की तुलजा भवानी, कोल्हापुर की महालक्ष्मी, औंढा नागनाथ और परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग, पंढरपुर का विठोबा मंदिर, अंबाजोगाई की योगेश्वरी देवी, नांदेड गुरुद्वारा, औदुंबर, नरसोबाची वाडी और शिखर शिंगणापुर जैसे कई प्रमुख तीर्थस्थलों तक पहुंच आसान होगी। इस तरह यह एक्सप्रेसवे सिर्फ नागपुर और गोवा के बीच यात्रा को तेज करने वाला मार्ग नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र को जोड़ने वाला बड़ा धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर भी बन सकता है।
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