दिल्ली: देश में रेलवे कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने 9 राज्यों में 8 मल्टीट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल करीब ₹20,804 करोड़ खर्च किए जाएंगे और इससे करीब 1,196 किलोमीटर रेल नेटवर्क बढ़ेगा।
9 राज्यों के 31 जिलों को मिलेगा फायदा
इन परियोजनाओं के जरिए पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 31 जिलों में रेलवे की क्षमता बढ़ाई जाएगी। सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2029-30 तक पूरा करना है। नई रेल लाइनें बनने से व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और मौजूदा रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इसका फायदा यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों को भी मिलेगा।
₹10,783 करोड़ की लागत से 656 किमी का विस्तार
इन 8 परियोजनाओं में से 3 परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होंगी। इन पर करीब ₹10,783 करोड़ खर्च किए जाएंगे और लगभग 656 किलोमीटर रेलवे ट्रैक जोड़ा जाएगा। इनमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इनसे करीब 4,790 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
दक्षिण भारत में भी बढ़ेगी रेलवे की क्षमता
बाकी 5 परियोजनाएं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में होंगी। इनकी अनुमानित लागत करीब ₹10,021 करोड़ है और इनके तहत करीब 540 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
इनमें अरक्कोनम-रेनिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी लाइन, व्हाइटफील्ड-बंगारपेट तीसरी और चौथी लाइन, होसुर-ओमलूर डबलिंग, सेलम-करूर-दिंडीगुल डबलिंग और सिकंदराबाद-घटकेसर-काजीपेट मल्टीट्रैकिंग जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
6,900 से ज्यादा गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी
सरकार के मुताबिक सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद करीब 6,911 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इन गांवों की कुल आबादी करीब 1.1 करोड़ है। परियोजनाओं से औद्योगिक और खनन क्षेत्रों के साथ-साथ प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी। इसमें तिरुपति, कोडाइकनाल, बांधवगढ़, जगन्नाथ मंदिर और अमरकंटक जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
माल ढुलाई की क्षमता में भी होगा इजाफा
रेलवे के मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट का एक बड़ा फायदा माल ढुलाई को मिलेगा। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन परियोजनाओं से हर साल करीब 7.4 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता तैयार हो सकती है। इन रूटों पर कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं की ढुलाई में तेजी आने की उम्मीद है।
PM Gati Shakti से जुड़े हैं प्रोजेक्ट
इन परियोजनाओं को PM Gati Shakti National Master Plan के तहत तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि मल्टीट्रैकिंग से रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और माल एवं यात्रियों की आवाजाही ज्यादा सुचारु होगी। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत और परिवहन की दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
5 major railway projects worth over Rs. 10,000 crore Rupees.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 9, 2026
Better rail connectivity in South India.
Lakhs of people to benefit.
Today’s Cabinet decision ensures faster passenger movement, stronger connectivity and additional freight capacity. https://t.co/z8AvZAZBjk
PM मोदी ने भी बताई अहमियत
इन रेलवे परियोजनाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली CCEA ने मंजूरी दी है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने इस फैसले को देश की कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है। खास तौर पर जिन राज्यों में पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियां ज्यादा हैं, वहां बेहतर रेल कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, ₹20,804 करोड़ की लागत वाली ये 8 परियोजनाएं 1,196 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाएंगी। इससे 9 राज्यों के 31 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आने वाले वर्षों में यात्री और माल परिवहन दोनों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
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