दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन कर रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली पुलिस ने डिटेन कर लिया। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल रहे। सुबह 5 बजे पुलिस ने अंकिता के माता-पिता को रिहा कर दिया। जिसके बाद वह अपने रिश्तेदार के घर चले गए। अंकिता के पिता ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने को लेकर 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी अपने ही नेता को बचाने में लगी है?

कांग्रेस के कार्यकर्ता भी प्रोटेस्ट में शामिल

यह प्रदर्शन बीजेपी के दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद शुरू हुआ। अंकिता भंडारी के माता-पिता समेत उत्तराखंड की जनता बीजेपी के दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का विरोध कर रही है। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ अंकिता भंडारी के माता-पिता जहां दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे। उनका साथ देने के लिए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी प्रोटेस्ट में शामिल हुए। तो वहीं दूसरे तरफ सरकार के इस फैसलें का विरोध उत्तराखण्ड में भी किया जा रहा है।

देर रात किया डिटेन सुबह छोड़ा

अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ कांग्रेस के कार्यकर्ता भी प्रोटेस्ट में शामिल हुए। लेकिन देर रात दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता समेत कई प्रदर्शनकारियों को डिटेन करा और सुबह रिहा कर दिया। अंकिता के पिता ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

क्या बोले अंकिता के पिता

मामले में बेबस पिता विरेंद्र सिंह भंडारी ने इस राजनीतिक नियुक्ति के लिए जवाबदेही की मांग की है। पिता का कहना है कि दुष्यंत गौतम को जेल में होना चाहिए। मैं राष्ट्रपति से निवेदन करता हूं सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत को इस पद पर नियुक्त न किया जाए। आपको बता दें कि बुधवार को कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अंकित भंडारी के माता-पिता से इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन के दौरान मुलाकात की उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनके साथ है।

कब हुई थी

अंकिता की हत्या 18 सितंबर 2022 को हुई थी। 24 सितंबर को उसका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। जिस रिसॉर्ट में अंकिता काम करती थी उसका मालिक निष्कासित भाजपा नेता विनोद आर्या है। विनोद के बेटे पुलत आर्या 2 कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ याचिका दायर की गई। 30 मई 2025 को कोटद्वार में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रीना नेगी ने हत्या सबूत नष्ट करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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