Delhi-Karnal Namo Bharat Corridor: दिल्ली से हरियाणा के करनाल तक आने-जाने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में सफर की तस्वीर बदल सकती है। सड़क पर लगने वाले जाम और लंबे सफर से राहत देने की उम्मीद के बीच दिल्ली-करनाल नमो भारत कॉरिडोर की तैयारियों ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। परियोजना के लिए मिट्टी परीक्षण और जियोटेक्निकल जांच पूरी होने के बाद अब निर्माण से जुड़ी तकनीकी योजना तैयार करने में मदद मिलेगी।

मिट्टी की जांच पूरी, अब मजबूत नींव की तैयारी
किसी भी बड़े रेल कॉरिडोर की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित दिल्ली-करनाल कॉरिडोर के अलग-अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए। मशीनों की मदद से जमीन की खुदाई कर इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया।

जांच में मिट्टी की प्रकृति, मजबूती और भार सहने की क्षमता का आकलन किया गया। रिपोर्ट के आधार पर इंजीनियर अलग-अलग स्थानों पर एलिवेटेड ट्रैक और पिलर की नींव के लिए उपयुक्त संरचना निर्धारित कर सकेंगे। इससे सुरक्षित और टिकाऊ निर्माण की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

136 किलोमीटर का कॉरिडोर, करीब डेढ़ घंटे में पूरा होगा सफर
प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर हरियाणा के विभिन्न शहरों से गुजरते हुए करनाल तक पहुंचेगा। करीब 136 किलोमीटर लंबे इस रूट का उद्देश्य दिल्ली और हरियाणा के बीच क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।

परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली से करनाल तक का सफर करीब डेढ़ घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। इससे नौकरी, कारोबार और अन्य जरूरी कामों के लिए दोनों क्षेत्रों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को राहत मिल सकती है।

33 हजार करोड़ रुपये की परियोजना, हरियाणा भी करेगा निवेश
दिल्ली-करनाल नमो भारत कॉरिडोर पर करीब 33 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना में हरियाणा सरकार की हिस्सेदारी 7,472 करोड़ रुपये बताई गई है। कॉरिडोर के लिए हरियाणा सरकार रूट में आने वाली जमीन की सीधे खरीद करने की योजना भी बना चुकी है। यह परियोजना केवल तेज रफ्तार परिवहन तक सीमित नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी से दिल्ली और हरियाणा के बीच रोजगार, कारोबार और शहरी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली से करनाल तक प्रस्तावित स्टेशन
कॉरिडोर पर दिल्ली, सोनीपत, पानीपत और करनाल क्षेत्र में स्टेशन विकसित करने की योजना है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में स्टेशनों की कुल संख्या 17 बताई गई है, जबकि नीचे दिए गए नामों की संख्या उससे अधिक है। इसलिए अंतिम स्टेशन सूची और उनकी संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। प्रस्तावित रूट से जुड़े प्रमुख स्थानों में सराय काले खां, नरेला, कुंडली, बहालगढ़ चौक, मुरथल, गन्नौर, बरही, केएमपी, पानीपत, समालखा, सिवाह, पानीपत सिटी, कोहांड, घरौंडा, सेक्टर-7 और करनाल बाईपास समेत अन्य स्थान शामिल बताए गए हैं।

अब आगे क्या?
मिट्टी परीक्षण और जियोटेक्निकल जांच पूरी होना परियोजना की तकनीकी तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर नींव और निर्माण से जुड़े फैसले लिए जा सकेंगे। हालांकि, इस चरण को निर्माण पूरा होने या ट्रेन संचालन की तारीख तय होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली से करनाल तक नमो भारत सेवा शुरू होने पर यात्रियों को तेज सफर का विकल्प मिलने की उम्मीद है। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि परियोजना की अगली प्रक्रियाएं कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं। 

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