Bihar Flood News: बिहार के भागलपुर जिले के राघोपुर इलाके में गंगा नदी के तेज कटाव ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। कटाव की चपेट में आकर जमीन के बड़े हिस्से नदी में समा गए। मंगलवार को करीब 100 साल पुराना प्रसिद्ध चैती दुर्गा मंदिर भी गंगा की तेज धार में समा गया। मंदिर के नदी में विलीन होने से स्थानीय लोगों में गहरा दुख और चिंता है। गंगा के लगातार बदलते प्रवाह और तेज धार के कारण इलाके में कटाव तेजी से बढ़ रहा है। बिहार के जल संसाधन विभाग के मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण और कठिन बताया है।
महादेवपुर तटबंध के पास भी बढ़ी चिंता
जल संसाधन विभाग के सचिव ने बताया कि जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने, प्रवाह में बदलाव, भारी मात्रा में गाद जमा होने और तेज धार के कारण कई स्थानों पर कटाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि महादेवपुर तटबंध के आसपास तेज धार और लगातार हो रहे कटाव के चलते स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सुरक्षात्मक कार्यों के जरिए तटबंध के बड़े हिस्से को सुरक्षित किया गया है, लेकिन ढांचे के पास मिट्टी बहने और कटाव का सिलसिला जारी है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था
कटाव से प्रभावित लोगों की मदद के लिए जिला प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। नाथनगर के शंकरपुर स्थित मिडिल स्कूल में सामुदायिक रसोई शुरू करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर पहले से चार सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। प्रशासन जरूरत के अनुसार राहत शिविर भी तैयार कर रहा है, जहां प्रभावित लोगों को भोजन, पीने का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जनवी चौक के पास गणेश बासा में भी एक राहत शिविर बनाया जा रहा है।
भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी जान, जरूरी सामान और पशुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें तथा प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सलाह का पालन करें। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव टीमों से संपर्क करने की अपील की है। गंगा के तेज कटाव में 100 साल पुराने चैती दुर्गा मंदिर के समा जाने के बाद राघोपुर और आसपास के इलाकों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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