4 years of Bharat Jodo Yatra: 4 साल पहले कन्याकुमारी से शुरू हुई राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को कांग्रेस ने पार्टी के लिए निर्णायक और नई ऊर्जा देने वाला अभियान बताया। 4,080 किलोमीटर की यह पदयात्रा 145 दिनों में 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरी और 30 जनवरी 2023 को श्रीनगर में समाप्त हुई थी।

कांग्रेस ने बताया ऐतिहासिक मोड़

यात्रा की चौथी सालगिरह पर कांग्रेस के आधिकारिक X हैंडल ने कहा कि पार्टी ने इसे इस विश्वास के साथ शुरू किया था कि प्यार नफरत को और उम्मीद डर को हरा सकती है। पार्टी के मुताबिक, हजारों किलोमीटर की यात्रा और लोगों से हुई अनगिनत बातचीत के बाद यह विश्वास और मजबूत हुआ है।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने भारत जोड़ो यात्रा को अहम मोड़ बताते हुए कहा कि इसने मोदी सरकार के कथित झूठ और प्रोपेगैंडा को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यात्रा ने देश में प्यार, धर्मनिरपेक्षता, समानता और संवैधानिक मूल्यों का संदेश पहुंचाया। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मिशन अभी अधूरा है।

जयराम रमेश ने बताया वैचारिक चुनौती

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यात्रा को समकालीन भारतीय राजनीति में बदलाव लाने वाली घटना बताया। उनके अनुसार, यह RSS और BJP के संवैधानिक सिद्धांतों पर कथित हमले के खिलाफ एक वैचारिक चुनौती थी। उन्होंने कहा कि यात्रा लोगों को भाषण देने के बजाय उनकी चिंताओं को सुनने के लिए थी।

नेताओं ने साझा किए अनुभव

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने यात्रा के दौरान राहुल गांधी के साथ पैदल चलने को याद किया और कहा कि इससे लोगों के बीच रहने तथा उनकी जरूरतों को समझने की पार्टी की प्रतिबद्धता मजबूत हुई।

कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कन्याकुमारी से यात्रा शुरू होने के समय अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस अभियान ने राहुल गांधी को और मजबूत जननेता बनाया और कांग्रेस को फिर से लोगों तक पहुंचने वाला आंदोलन बनाया।

ये भी पढ़ें: Gold Silver Price Today: 1 महीने में कितना बढ़ा सोना और चांदी? जानिए पूरा हिसाब

राहुल गांधी ने बताया यात्रा का असर

राहुल गांधी ने 2024 में यात्रा के अनुभव को याद करते हुए कहा था कि उन्होंने इससे “खामोशी की खूबसूरती” और लोगों को वास्तव में सुनने का महत्व सीखा। उनके मुताबिक, हर आवाज में कुछ नया सीखने को मिला और यात्रा ने यह भरोसा मजबूत किया कि भारतीय स्वभाव से प्यार करने वाले लोग हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भारत जोड़ो यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं थी, बल्कि लोगों से संवाद और देश को एकजुट करने की राजनीतिक पहल थी। चार साल बाद भी पार्टी इसे अपने वैचारिक और राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव मान रही है।