Delhi HC on Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत ढहने की घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को मामले की उच्चतम कार्यकारी स्तर पर जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसे का शिकार हुई इमारत का निर्माण और संचालन जरूरी अनुमतियों के तहत हो रहा था या नहीं।

कोर्ट ने इसके साथ ही दिल्ली में MCD के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पेइंग गेस्ट (PG) आवास और हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर व्यापक ऑडिट और निरीक्षण करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित निजी पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

हाईकोर्ट ने पूछा- इमारत को सभी जरूरी मंजूरियां मिली थीं?
हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन में गिरी इमारत की जांच के लिए कई बिंदु तय किए हैं। MCD को यह जांचना होगा कि भवन निर्माण के लिए सभी जरूरी अनुमतियां ली गई थीं या नहीं और इमारत का इस्तेमाल स्वीकृत नियमों के मुताबिक किया जा रहा था या नहीं। जांच में यह भी पता लगाने को कहा गया है कि अगर अधिकारियों की ओर से कोई चूक या लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रस्तावित या की गई कार्रवाई का ब्योरा भी देना होगा। यानी जांच का दायरा सिर्फ भवन मालिक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर संभावित चूक और जवाबदेही की भी पड़ताल होगी।

एक हफ्ते में दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल की जांच
कोर्ट ने MCD को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी PG और हॉस्टल का निरीक्षण एक सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा है।

इस निरीक्षण में मुख्य रूप से यह देखा जाएगा
PG और हॉस्टल जरूरी अनुमतियों के तहत संचालित हो रहे हैं या नहीं।
भवन निर्माण और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
संबंधित इमारतें लागू बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप हैं या नहीं।
प्रत्येक PG में कितने छात्र रह रहे हैं।
सुरक्षा और निर्माण मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

कोर्ट ने PG और निजी हॉस्टलों को लेकर मौजूद नियामक व्यवस्था की जानकारी भी मांगी है। यानी यह भी स्पष्ट करना होगा कि इन संस्थानों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा नियम क्या हैं और उनकी निगरानी किस तरह की जाती है।

सिर्फ मकान मालिक जिम्मेदार नहीं, अधिकारियों की भी जवाबदेही
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण बात कही कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी केवल भवन मालिकों तक सीमित नहीं हो सकती। संबंधित सरकारी एजेंसियों का भी वैधानिक दायित्व है कि निर्माण और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर संबंधित अधिकारियों ने अपने वैधानिक दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन किया होता तो संभव है कि ऐसी घटनाओं को टाला जा सकता था।

यह टिप्पणी अब सत्य निकेतन हादसे में निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल को और गंभीर बनाती है।

DU से भी मांगी आउटस्टेशन छात्रों और हॉस्टल की जानकारी
हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से भी जानकारी मांगी है। विश्वविद्यालय को बताना होगा कि उसके यहां कितने आउटस्टेशन छात्र पढ़ रहे हैं और उन्हें उपलब्ध कराने के लिए कितने हॉस्टल की सुविधा मौजूद है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की कमी पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी PG में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यही वजह है कि सत्य निकेतन जैसे छात्र बहुल इलाकों में निजी PG की सुरक्षा और नियमन का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

'दो मंजिल की अनुमति, बना दी कई मंजिलें'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुछ PG संचालकों की ओर से कथित रूप से किए जा रहे लापरवाह और अनधिकृत निर्माण पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि कई बार जिन इमारतों को सिर्फ दो मंजिल बनाने की अनुमति होती है, उनमें मूल नींव को बदले बिना कई अतिरिक्त मंजिलें बना दी जाती हैं। ऐसी स्थिति में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने PG और हॉस्टल के लिए प्रभावी नियामक तंत्र की जरूरत पर भी जोर दिया।

MCD और दिल्ली पुलिस ने दी रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी
सुनवाई के दौरान MCD और दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि घटना के बाद हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाएगा। वहीं सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिन के भीतर अपनी प्रतिक्रिया और हलफनामे रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।

एक दिन पहले ढही थी बहुमंजिला PG इमारत
हाईकोर्ट के ये निर्देश सत्य निकेतन में बहुमंजिला PG इमारत ढहने के एक दिन बाद आए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन बड़ी संख्या में छात्रों के रहने वाले प्रमुख इलाकों में शामिल है। इमारत गिरने के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। हादसे ने एक बार फिर राजधानी में निजी PG, हॉस्टल और छात्र आवासों में निर्माण एवं सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

PIL में स्वतंत्र जांच और व्यापक सेफ्टी ऑडिट की मांग
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के सामने एक जनहित याचिका (PIL) भी दाखिल की गई है। इसमें घटना की स्वतंत्र जांच कराने के साथ-साथ दिल्ली के PG, हॉस्टल और छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य आवासीय परिसरों का व्यापक संरचनात्मक और सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की गई है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सवाल सिर्फ सत्य निकेतन की एक इमारत तक सीमित नहीं रह गया है। अगले एक सप्ताह में दिल्ली के PG और हॉस्टलों की जांच का आदेश इस बात की परीक्षा भी होगी कि राजधानी में छात्रों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियम जमीन पर कितने प्रभावी हैं।

सत्य निकेतन का हादसा एक इमारत के गिरने की घटना से आगे बढ़ चुका है। अब सवाल यह है कि क्या जांच और ऑडिट के बाद दिल्ली के हजारों छात्रों को सुरक्षित आवास मिल पाएगा, या फिर सिस्टम अगली घटना का इंतजार करेगा?