देशभर में दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है, लेकिन भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां रावण को जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। इसके पीछे स्थानीय मान्यताएं, धार्मिक आस्था और पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं। आइए जानते हैं उन 7 जगहों के बारे में, जहां रावण को अलग नजरिए से देखा जाता है।
कानपुर, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के कानपुर में बना दशानन मंदिर रावण की पूजा के लिए जाना जाता है, बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 135 साल पुराना है। यहां सालभर रावण के दर्शन नहीं होते, बल्कि दशहरे के दिन ही मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। बाकी दिनों में रावण की प्रतिमा ढकी रहती है। दशहरे पर भक्त मंदिर पहुंचते हैं, पूजा करते हैं और तेल के दीपक जलाते हैं। मान्यता है कि लोग रावण से ज्ञान, बुद्धि और शक्ति का आशीर्वाद मांगते हैं।
रावनग्राम, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के विदिशा के पास स्थित रावनग्राम में भी दशहरे पर रावण दहन की परंपरा नहीं है। यहां के लोग रावण के प्रति अपनी आस्था रखते हैं। इस गांव में रावण की एक बड़ी प्रतिमा होने की बात भी कही जाती है। यहां की परंपरा दिखाती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रामायण के पात्रों को लेकर लोगों की मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
बिसरख गांव, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के पास स्थित बिसरख गांव को रावण से जोड़कर देखा जाता है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, इस जगह का संबंध रावण के पिता ऋषि विश्रवा से है। इसी वजह से गांव के लोगों के मन में रावण के लिए खास सम्मान है। यहां दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के बजाय रावण की पूजा की जाती है। गांव में रावण का मंदिर भी है, जहां लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदसौर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के मंदसौर में भी रावण की पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का संबंध इसी क्षेत्र से था। इस वजह से मंदसौर को रावण का ससुराल भी कहा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, रावण यहां के लोगों के लिए दामाद के समान है। यही कारण है कि कुछ इलाकों में दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाने के बजाय पूजा की जाती है।
जोधपुर, राजस्थान
राजस्थान के जोधपुर में कुछ समुदाय रावण को अपना पूर्वज मानते हैं। इनकी परंपराओं में रावण का संबंध उनके वंश और पारिवारिक इतिहास से जोड़ा जाता है। इसी वजह से दशहरे के दिन ये लोग रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा करते हैं। यहां की यह परंपरा बताती है कि रावण को लेकर हर समुदाय की सोच एक जैसी नहीं है। कुछ लोगों के लिए वह धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
काकिनाडा, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के काकिनाडा में रावण को समर्पित एक मंदिर है। यहां रावण को एक शक्तिशाली राजा और भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं में उसकी शिवभक्ति और उसके पराक्रम को खास महत्व दिया जाता है। मंदिर में रावण के साथ भगवान शिव की पूजा किए जाने की परंपरा भी बताई जाती है। इसी वजह से यहां रावण को देखने का नजरिया उन जगहों से अलग है, जहां दशहरे पर उसका पुतला जलाया जाता है।
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में भी रावण को लेकर कुछ अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। यहां कुछ स्थानों पर रावण को भगवान शिव का महान भक्त मानकर सम्मान दिया जाता है। मान्यता है कि रावण ने कठोर तपस्या करके शिवजी को प्रसन्न किया था। कुछ स्थानीय परंपराओं में यह भी माना जाता है कि रावण को मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसी आस्था के चलते कुछ लोग दशहरे पर रावण का दहन करने के बजाय उसकी पूजा करते हैं।
अलग-अलग मान्यताओं का प्रतीक है दशहरा
दशहरा आमतौर पर बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में रावण को लेकर प्रचलित मान्यताएं इस त्योहार को एक अलग रूप देती हैं। कहीं रावण को शिवभक्त माना जाता है, तो कहीं रावण के संबंध स्थानीय इतिहास, परिवार या वंश परंपरा से जोड़ा जाता है। ये परंपराएं भारत की सांस्कृतिक विविधता और अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं को दर्शाती हैं।