कैलिफोर्निया में काम कर चुके एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव पारती की कहानी विज्ञान और अध्यात्म के बीच एक नई बहस छेड़ती है। मरीजों को बेहोश करने की जिम्मेदारी निभाने वाले इस डॉक्टर ने खुद मौत के बेहद करीब पहुंचने का अनुभव होने का दावा किया, उनके मुताबिक, साल 2010 में गंभीर संक्रमण से जूझने के दौरान उन्हें ऐसा अनुभव हुआ, जिसने जिंदगी को देखने का उनका नजरिया पूरी तरह बदल दिया। इसे मेडिकल भाषा में ‘नियर डेथ एक्सपीरियंस’ (NDE) कहा जाता है। डॉ. पारती ने अपने अनुभव का जिक्र एक यूट्यूब वीडियो में भी किया है।

ऑपरेशन के दौरान शरीर से बाहर होने का अनुभव

डॉ. पारती के मुताबिक, साल 2010 में प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी के बाद उन्हें गंभीर संक्रमण यानी सेप्टीसीमिया हो गया था। क्रिसमस के दौरान उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें इमरजेंसी सर्जरी के लिए ले जाना पड़ा। इसी दौरान उन्हें जनरल एनेस्थीसिया दिया गया। डॉक्टर का दावा है कि उस समय उन्हें लगा कि उनकी चेतना शरीर से अलग हो गई है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद को ऑपरेशन टेबल से लगभग 10 से 12 फीट ऊपर हवा में तैरते हुए देखा। उनका कहना है कि एक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट होने के कारण उनके मन में सबसे पहले वैज्ञानिक सवाल आया कि क्या यह दवाओं के असर से हो रहा है। हालांकि, उनके अनुसार, वह केवल ऑपरेशन थिएटर की गतिविधियां ही नहीं देख रहे थे, बल्कि उन्हें भारत में मौजूद अपनी मां और बहन की मौजूदगी का भी अहसास हो रहा था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनके कपड़ों के रंग तक दिखाई दिए, जिन्हें बाद में उन्होंने फोन पर बातचीत के दौरान सही पाया।

अंधेरे लोक से चमकदार रोशनी तक का सफर

डॉ. पारती ने अपने अनुभव के अगले हिस्से को बेहद डरावना बताया। उनके अनुसार, उन्हें एक अंधकारमय जगह का अहसास हुआ, जहां बिजली कड़क रही थी और डरावनी आकृतियां दिखाई दे रही थीं, उन्होंने इस अनुभव को अपने पुराने व्यवहार, अहंकार और स्वार्थ से जोड़कर देखा।

उनके दावे के मुताबिक, इसी दौरान उन्हें अपने दिवंगत पिता दिखाई दिए, जिन्होंने उनका हाथ थामकर उन्हें एक चमकदार सुरंग की ओर बढ़ाया। पारती का कहना है कि सुरंग पार करने के बाद उन्हें राफेल और माइकल नाम के दो देवदूत मिले। हिंदू परिवार में जन्मे होने के बावजूद उन्होंने अपने अनुभव में ईसाई परंपरा से जुड़े इन पात्रों को देखने की बात कही।

डॉक्टर के अनुसार, इसके बाद वह एक बेहद शांत और सुंदर स्थान पर पहुंचे। वहां उन्हें चारों ओर सुकून महसूस हुआ और वातावरण में ‘ॐ’ की ध्वनि सुनाई देने का अनुभव हुआ, उन्होंने एक ऐसी दिव्य रोशनी का भी जिक्र किया, जिसकी चमक हजारों सूर्यों के समान थी, उनके मुताबिक, उस रोशनी से उन्हें डर के बजाय गहरे प्रेम, शांति और अपनत्व का अहसास हुआ।

आलीशान जिंदगी छोड़कर अपनाया नया रास्ता

डॉ. पारती का कहना है कि इस अनुभव के बाद उन्हें लगा कि उन्हें जिंदगी में दूसरा मौका मिला है और अब उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य बदलना चाहिए। उनके अनुसार, उन्हें भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर होकर दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिली।

उन्होंने दावा किया कि इसके बाद उन्होंने अपना लगभग 11 हजार वर्ग फुट का आलीशान घर और हमर तथा मर्सिडीज जैसी महंगी गाड़ियां बेच दीं। उनकी जीवनशैली में भी बड़ा बदलाव आया और वह साधारण टोयोटा कैमरी हाइब्रिड चलाने लगे। उनका कहना है कि पहले उन्हें अपराध और थ्रिलर से जुड़े कार्यक्रम देखना पसंद था, लेकिन बाद में उनकी रुचि फूड और ट्रैवल जैसे कार्यक्रमों में बढ़ गई।

अब लोगों को मानसिक और भावनात्मक मुश्किलों से उबरने में करते हैं मदद

डॉ. पारती के मुताबिक, उनके अनुभव ने उन्हें लोगों के दुख, मानसिक परेशानियों और जीवन में भावनात्मक संतुलन के महत्व को नए तरीके से समझने में मदद की। वह डिप्रेशन, नशे की लत और लंबे समय तक रहने वाले दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की सहायता करने पर जोर देने लगे, उनके अनुभव का मूल संदेश है कि इंसान को अपने भीतर झांकना चाहिए, दूसरों के प्रति प्रेम और करुणा रखनी चाहिए तथा पुरानी गलतियों से सीखना चाहिए। वह अपने जीवन में माफी, प्रेम और आत्म-सुधार को विशेष महत्व देते हैं।

हालांकि, नियर डेथ एक्सपीरियंस से जुड़े ऐसे अनुभव व्यक्तिगत दावों के दायरे में आते हैं। इन्हें आत्मा के अस्तित्व या मृत्यु के बाद जीवन जारी रहने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। फिर भी डॉ. पारती की कहानी इस बात को सामने लाती है कि जीवन के गंभीर संकट कभी-कभी व्यक्ति की सोच, प्राथमिकताओं और जीवनशैली में गहरा बदलाव ला सकते हैं।

 

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