World Breastfeeding Week 2026: मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम है। नवजात शिशुओं को मां का दूध यानि स्तनपान कराना चाहिए। दुनिया भर में स्तनपान के लिए जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से देशभर में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है- “सतत जीवन की बेहतर शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है, उसे मजबूत करें।”
गर्भावस्था से लेकर जन्म के बाद 24 महीने तक स्तनपान जरूरी
मंत्रालय के मुताबिक, इस अभियान में बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसमें गर्भावस्था से लेकर जन्म के बाद शुरुआती छह महीने और 24 महीने की उम्र तक की अवधि शामिल है। इस दौरान मिलने वाला पोषण, देखभाल और स्नेह बच्चे के मस्तिष्क के विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और जीवनभर के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।
यह अभियान पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) के तहत चलाया जा रहा है। देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य संस्थानों, सामुदायिक आउटरीच प्लेटफॉर्म और डिजिटल मीडिया के माध्यम से लोगों को स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान जरूरी
मंत्रालय ने परिवारों से अपील की है कि नवजात शिशु को जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध जरूर पिलाया जाए। इस समय को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है।
जन्म के बाद निकलने वाला गाढ़ा पहला दूध कोलोस्ट्रम कहलाता है। इसे बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें एंटीबॉडी और जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। इसलिए इसे किसी भी स्थिति में फेंकना नहीं चाहिए।
मां और बच्चे के बीच जन्म के तुरंत बाद त्वचा से त्वचा का संपर्क भी स्तनपान शुरू करने में मदद करता है और दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करता है।
6 महीने तक केवल मां का दूध
मंत्रालय ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक केवल स्तनपान कराया जाना चाहिए। इस दौरान बच्चे को पानी, शहद, घुट्टी, ग्लूकोज या फॉर्मूला दूध देने की जरूरत नहीं होती। मां का दूध इस अवधि में बच्चे की पोषण और पानी की जरूरतों को पूरा करने के साथ संक्रमण से बचाने में भी मदद करता है।
छह महीने की उम्र के बाद बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार पूरक आहार देना शुरू किया जाना चाहिए। इसके साथ स्तनपान दो साल या उससे अधिक समय तक जारी रखने की सलाह दी गई है।
कामकाजी माताओं को भी दी जा रही जानकारी
अभियान के दौरान माताओं को स्तनपान कराने की सही स्थिति और बच्चे के सही तरीके से दूध पीने के लिए पकड़ (अटैचमेंट) के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
माताओं को बच्चे की मांग के अनुसार बार-बार स्तनपान कराने और किसी परेशानी की स्थिति में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
काम पर वापस लौटने वाली माताओं को मां का दूध निकालकर सुरक्षित तरीके से स्टोर करने के बारे में भी जानकारी दी जा रही है, ताकि बच्चे को स्तनपान लगातार मिलता रहे।
यह भी पढ़ें: Gen Z के मुद्दे पर राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा? छात्रों ने हिंसा.....
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं, परिवारों और आम नागरिकों से ऐसा सहयोगी माहौल बनाने की अपील की है, जिसमें हर मां को स्तनपान कराने के लिए उचित सहयोग मिले और हर बच्चे को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिल सके।
Written By: Pradeep Singh