First Encounter In India: जब भी किसी बड़े अपराधी के खात्मे की खबर सामने आती है, तो 'एनकाउंटर' शब्द चर्चा का विषय बन जाता है। हाल ही में बिहार के भोजपुर में अपराधी भरत भूषण के एनकाउंटर के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि भारत में पहला पुलिस एनकाउंटर कब और किसका हुआ था।

1980 के दशक में मुंबई में था गैंगस्टर का बोलबाला

1980 के दशक की शुरुआत में मुंबई, जिसे तब बॉम्बे कहा जाता था, अपराध की दुनिया का बड़ा केंद्र बन चुकी थी। शहर में गैंगवार, अपहरण, सुपारी किलिंग और रंगदारी जैसी घटनाएं आम थीं। करीम लाला, बड़ा राजन और दाऊद इब्राहिम जैसे अपराधियों के गिरोह आपसी संघर्ष में लगे हुए थे। पुलिस पर लगातार दबाव बढ़ रहा था और आम जनता अपराधियों के आतंक से परेशान थी।

मनोहर अर्जुन सुर्वे का था मुंबई में दबदबा

इसी दौर में एक नाम तेजी से उभरा मनोहर अर्जुन सुर्वे, जिसे लोग मान्या सुर्वे के नाम से जानते थे। हैरानी की बात यह थी कि मान्या पढ़ाई में अच्छा छात्र माना जाता था, लेकिन परिस्थितियों ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया। वर्ष 1969 में हत्या के एक मामले में उसे और उसके भाई को उम्रकैद की सजा हुई। जेल में भी उसका दबदबा कायम रहा। बाद में वह अस्पताल से फरार होकर फिर मुंबई लौट आया और अपना गैंग खड़ा कर लिया।

सुर्वे का आतंक इतना बढ़ा की मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा दांव लगी

मान्या सुर्वे का आतंक इतना बढ़ गया कि मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई। अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया, जिसे देश की पहली एनकाउंटर स्क्वाड माना जाता है। इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारियों राजा तांबट और इशाक बागवान सहित विशेष टीम को सौंपी गई।

11 जनवरी 1982 में हुआ था पहला एनकाउंटर

11 जनवरी 1982 को पुलिस को सूचना मिली कि मान्या सुर्वे मुंबई के वडाला स्थित आंबेडकर कॉलेज के पास आने वाला है। पुलिस ने इलाके में घेराबंदी कर दी। दोपहर करीब डेढ़ बजे जैसे ही मान्या वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे चारों ओर से घेर लिया। बताया जाता है कि आत्मसमर्पण का मौका देने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और चली गोलियों में मान्या गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

भारत का पहला पुलिस एनकाउंटर बना

इसी घटना को भारत के पहले चर्चित पुलिस एनकाउंटर के रूप में देखा जाता है। इसके बाद देश के कई राज्यों में एनकाउंटर पुलिसिंग की अवधारणा तेजी से चर्चा में आई और यह भारतीय कानून-व्यवस्था के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया।

 

Written By: Geeta Sharma