पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, राज्य की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। हालांकि, यह घोषणापत्र केवल उर्दू भाषा में जारी किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

घोषणापत्र केवल उर्दू भाषा में होने पर BJP ने की आलोचना

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे भाषायी और तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

गिरिराज सिंह ने लगाया आरोप

4 अप्रैल 2026 को पटना में मीडिया से बात करते हुए गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि केवल उर्दू में घोषणापत्र जारी करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, उन्होंने दावा किया कि इसके पीछे एक “छिपा एजेंडा” है, जो कथित तौर पर शरिया कानून से जुड़ा हुआ है, उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश जैसी स्थिति में ले जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य की जनता, खासकर हिंदू समाज, अब इन बातों को समझ चुका है, उनके अनुसार, इस बार का चुनाव पश्चिम बंगाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और जनता ऐसे मुद्दों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेगी।

जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर ध्यान नहीं- गिरिराज सिंह

इससे पहले 3 अप्रैल 2026 को भी गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा था, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में राज्य सरकार ने केवल तुष्टीकरण की राजनीति की है और जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, उनके मुताबिक, गरीबी, बेरोजगारी, हिंसा और दुष्कर्म जैसे गंभीर विषयों पर मुख्यमंत्री कभी खुलकर जवाब नहीं देतीं।

 Written By Toshi Shah