Ashok Kharat Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद गहराता नजर आ रहा है, जिसमें रूपाली चाकणकर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्वयंभू बाबा अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद उनके साथ कथित संबंधों को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम का असर न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत छवि पर पड़ा है, बल्कि उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पर भी पड़ रहा हैं।

रूपाली चाकणकर महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने की चर्चा

जानकारी के मुताबिक, रूपाली चाकणकर पहले ही महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों और निष्पक्ष जांच का हवाला दिया था। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे बढ़ते दबाव का परिणाम माना जा रहा है। इसके साथ ही पार्टी के भीतर उन्हें महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से भी हटाने को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है।

विवाद का पार्टी की छवि पर पड़ेगा प्रभाव

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में यह विचार किया गया कि मौजूदा विवाद का पार्टी की छवि पर क्या प्रभाव पड़ रहा है और आगामी चुनावों को देखते हुए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

NCP पर लगा अशोक खरात को संरक्षण देने का आरोप

पार्टी के अंदर कई नेताओं और पदाधिकारियों का मानना है कि रूपाली चाकणकर को महिला प्रदेशाध्यक्ष पद पर बनाए रखना संगठन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। विपक्ष भी लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है और उन पर अशोक खरात को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगा रहा है। इसके साथ ही उनके नार्को टेस्ट की मांग भी जोर पकड़ रही है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।

अशोक खरात विवाद पर NCP में मची हलचल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NCP (अजित पवार गुट) इस मामले में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि पार्टी जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला ले सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह कदम पार्टी की छवि को बचाने और संभावित राजनीतिक नुकसान को कम करने की रणनीति का हिस्सा होगा। फिलहाल, सभी की नजरें पार्टी के आधिकारिक निर्णय पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

Writen By: Geeta Sharma