जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले स्थित कलियर में आयोजित राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम, मुसलमानों की भूमिका और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं, जिन पर विवाद खड़ा हो गया है।

'देश को आजादी दिलाने में मुसलमानों ने किया ज्यादा संघर्ष'

मौलाना मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब देश को आजाद कराने के लिए जिहाद का आह्वान किया गया था। उनके अनुसार, गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए संघर्ष करना हर मुसलमान का कर्तव्य था। उन्होंने दावा किया कि आजादी की इस लड़ाई की शुरुआत मदरसों से हुई थी और जो लोग इस इतिहास को नहीं जानते, वे वास्तविक तथ्यों से अजान हैं।

'देश की आजादी में मुस्लिम समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण रही'

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में मुसलमानों और धार्मिक संस्थानों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी और विकास में मुस्लिम समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आज उन्हीं मस्जिदों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने कभी स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया था।

'सरकारों ने मुसलमानों को दंगों में उलझाए रखा'

मदनी ने कहा कि आजादी के बाद विभिन्न सरकारों ने मुसलमानों को दंगों और सामाजिक अशांति में उलझाए रखा, जबकि वर्तमान सरकार पर उन्होंने मुस्लिम समुदाय और इस्लाम के प्रति विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर धार्मिक स्थलों और मदरसों को बुलडोजर कार्रवाई के तहत ध्वस्त किया जा रहा है।

'देश प्रेम और आपसी सद्भाव से चलता है नफरत से नहीं'

अपने भाषण में उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुसलमानों ने देश के लिए बहुत कुछ किया है, लेकिन बदले में उन्हें आज क्या मिल रहा है। उन्होंने भीड़ हिंसा, धार्मिक भेदभाव और मुस्लिम समुदाय की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश प्रेम और आपसी सद्भाव से चलता है, न कि नफरत और विभाजन की राजनीति से।

मदनी ने सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने की अपील की

मौलाना मदनी ने लोगों से नफरत की राजनीति छोड़कर प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और स्नेह का भाव रखना चाहिए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल में आई बाढ़ के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों की सहायता का उल्लेख किया और कहा कि संगठन हमेशा मानव सेवा के कार्यों में अग्रणी रहा है।

 Written By: Geeta Sharma