हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह की विशेष ज़ियारत (छोटा उर्स, माह-ए-मुहर्रम) के अवसर पर जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर अजमेर शरीफ़ स्थित क़ायद-ए-विश्राम स्थली मैदान में छह दिवसीय निःशुल्क मेडिकल कैंप का सफल आयोजन किया गया। इस सेवा शिविर के माध्यम से दूर-दराज़ से आने वाले जायरीन-ए-ख्वाजा को मुफ्त चिकित्सा परामर्श तथा आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।

मुफ्त दवाइयों का हुआ वितरण

जमीयत उलेमा जिला अजमेर शरीफ़ की निगरानी में संचालित यह मेडिकल कैंप 17 जून 2026 से 22 जून 2026 तक लगातार जारी रहा। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों और दूरस्थ क्षेत्रों से आए कुल 1415 मरीजों एवं जायरीन का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा उन्हें निःशुल्क दवाइयां प्रदान की गईं। बता दें भीषण गर्मी और अत्यधिक भीड़ के बावजूद चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और आयोजकों ने समर्पण, त्याग और सेवा-भाव की मिसाल पेश करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन किया। कैंप में डॉ. सलीम अहमद (किशनगढ़), डॉ. अब्दुल वाजिद (ओंटरा), डॉ. अब्दुल कादिर (ओंटरा), डॉ. राम गिरी (किशनगढ़) तथा नजमा बानो (सहायक) ने महत्वपूर्ण चिकित्सीय सेवाएं प्रदान कीं।

जमीयत की चिकित्सा सेवा को जायरीन ने बताया समय की अहम जरूरत

जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के केंद्रीय कार्यालय की ओर से मौलाना अलीमुद्दीन अजमेरी और मौलाना मोहम्मद कामिल मेरठी पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे। वहीं क़ारी कमरुद्दीन ख़ां, अध्यक्ष जमीयत उलेमा जिला अजमेर शरीफ़, सहित जिला जमीयत के कार्यकर्ता कैंप के संचालन एवं प्रशासनिक व्यवस्था में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। इस दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी भी लगातार आयोजकों के संपर्क में रहे। जायरीन ने जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की इस जनसेवा की सराहना करते हुए कहा कि उर्स के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए यह चिकित्सा सुविधा अत्यंत उपयोगी, आवश्यक और समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता साबित हुई।

बुजुर्गों की विरासत और सूफ़ी विचारधारा का जीवंत प्रतीक है जमीयत

उल्लेखनीय है कि जमीयत उलेमा-ए-हिन्द वर्ष 1970 से ख्वाजा गरीब नवाज़ के उर्स के अवसर पर सामाजिक एवं चिकित्सीय सेवाएं प्रदान करती आ रही है। यद्यपि कुछ कारणों से बीच में यह सिलसिला प्रभावित हुआ था, पर सेवा और मानवता की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इसे पुन प्रारंभ किया गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के बुजुर्गों का आध्यात्मिक संबंध हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह से रहा है और उनकी शिक्षाओं से विशेष अनुराग पाया जाता है। हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ का यह प्रसिद्ध कथन कि “तरीक़त और तसव्वुफ़ ईश्वर से प्रेम तथा उसकी सृष्टि की सेवा, इन दो तत्वों से अस्तित्व में आते हैं और इसी का नाम विलायत है” वास्तव में उसी आध्यात्मिक एवं मानवीय विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के बुजुर्गों ने अपने जीवन, चरित्र और सेवाओं के माध्यम से जीवंत बनाए रखा है।

दरगाह कमेटी ने सराहा जमीयत का सामाजिक एवं चिकित्सीय योगदान

कैंप के समापन अवसर पर दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज़ अजमेर शरीफ़ के प्रशासन एवं दरगाह कमेटी द्वारा जमीयत उलेमा अजमेर शरीफ़ की सेवाओं की विशेष सराहना की गई। दरगाह के नाज़िम एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जनाब मोहम्मद बिलाल ख़ान ने जमीयत की पूरी टीम को प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान-पत्र प्रदान करते हुए उनकी सामाजिक, चिकित्सीय और जनसेवा संबंधी गतिविधियों को अनुकरणीय बताया। प्रशस्ति-पत्र में जायरीन की सेवा, चिकित्सा सहायता तथा प्रशासनिक सहयोग के लिए जमीयत के प्रयासों की विशेष प्रशंसा की गई।

सेवा, समर्पण और इंसानियत के मिशन को आगे बढ़ाती रहेगी जमीयत

इस अवसर पर जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने डॉक्टरों, स्वयंसेवकों, आयोजकों तथा सभी सहयोगियों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि मानव सेवा जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की जीवंत परंपरा और उसके बुजुर्गों की अमूल्य विरासत है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि सीमित संसाधनों और कम समय के बावजूद जायरीन-ए-ख्वाजा को उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, साथ ही उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी सेवा-भाव, समर्पण और मानवता की भावना के साथ ऐसे कल्याणकारी कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे।

 

Written BY : M. Athar Uddin Munne Bharati

Edited By : Toshi Shah