स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए दक्षिण-पूर्वी जिले में व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया। कालकाजी मंदिर और नेहरू प्लेस जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में किए गए इन अभ्यासों के दौरान आतंकी हमले, बम धमाके और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखा गया। इन मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य पुलिस और विभिन्न आपातकालीन एजेंसियों की ऑपरेशनल तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और आपसी समन्वय का आकलन करना था।

कालकाजी मंदिर में तीन घंटे से ज्यादा चला मॉक ड्रिल

दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार, कालकाजी मंदिर में 7 अगस्त की रात 9 बजे से 12:30 बजे तक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास के तहत मंदिर परिसर में अलग-अलग स्थानों पर दो काल्पनिक बम धमाके और आतंकवादी हमले की स्थिति तैयार की गई। सिमुलेटेड घटना के बाद बीट अधिकारी ने मॉक PCR कॉल की, जिसे पुलिस कंट्रोल रूम के माध्यम से संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाया गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और अन्य आपातकालीन एजेंसियों ने अपने निर्धारित SOP के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। मौके पर पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी की और लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करते हुए ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए।

NSG और SWAT ने आतंकियों को किया 'न्यूट्रलाइज'

मॉक ड्रिल में NSG, SWAT टीम, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS), बम डिटेक्शन टीम (BDT), डॉग स्क्वॉड, दिल्ली पुलिस PCR, टाइगर PCR, ट्रैफिक पुलिस, DDMA, दिल्ली फायर सर्विस और CATS ने हिस्सा लिया। BDS और BDT ने डॉग स्क्वॉड की मदद से घटनास्थल पर बम की तलाश और एंटी-सैबोटाज जांच की। वहीं, NSG और SWAT टीम ने अभ्यास में शामिल दो काल्पनिक आतंकवादियों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया।

घायल व्यक्ति को 20 मिनट में AIIMS पहुंचाया

मॉक ड्रिल के दौरान एक घायल व्यक्ति की स्थिति भी बनाई गई। उसे घटनास्थल से सुरक्षित निकालकर PCR वाहन के जरिए 20 मिनट के भीतर AIIMS अस्पताल पहुंचाया गया। इस अभ्यास के जरिए आपात स्थिति में घायल व्यक्ति को सुरक्षित निकालने, प्रभावित इलाके से मेडिकल टीम और वाहन को तेजी से निकालने तथा अस्पताल तक समय पर पहुंचाने की क्षमता का परीक्षण किया गया।

नेहरू प्लेस में भी आतंकी हमले का अभ्यास

दक्षिण-पूर्वी जिले के प्रमुख व्यावसायिक और भीड़भाड़ वाले इलाके नेहरू प्लेस में भी अलग से मॉक ड्रिल आयोजित की गई। यहां भी दो अलग-अलग स्थानों पर काल्पनिक बम धमाके की स्थिति तैयार की गई। मॉक PCR कॉल के बाद पुलिस और विशेषज्ञ टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। इलाके की घेराबंदी करने के साथ ही लोगों की आवाजाही नियंत्रित की गई और इमरजेंसी वाहनों की आवाजाही के लिए ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया। NSG, SWAT, BDS, BDT और डॉग स्क्वॉड ने इलाके में व्यवस्थित तलाशी, बम डिटेक्शन और एंटी-सैबोटाज जांच की। इसके अलावा PCR, टाइगर PCR, ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, DDMA और CATS ने भी संयुक्त रूप से रेस्क्यू और आपातकालीन प्रतिक्रिया में हिस्सा लिया।

पूरी इमरजेंसी रिस्पॉन्स चेन को किया गया टेस्ट

दोनों मॉक ड्रिल के दौरान आतंकवादियों को निष्क्रिय करने से लेकर घायल व्यक्ति के रेस्क्यू, घटनास्थल को सुरक्षित करने, बम की जांच और निस्तारण, भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक मैनेजमेंट और मेडिकल इवैक्यूएशन तक पूरी इमरजेंसी रिस्पॉन्स चेन को परखा गया। अभ्यास में खास तौर पर 20 मिनट के मेडिकल इवैक्यूएशन बेंचमार्क पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी वास्तविक आपात स्थिति में एंबुलेंस और अन्य मेडिकल वाहनों को प्रभावित क्षेत्र से बिना रुकावट तेजी से निकाला जा सके।

स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा तैयारियों की अहम परीक्षा

पुलिस के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े राष्ट्रीय आयोजन से पहले इस तरह के मॉक ड्रिल बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके जरिए संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के साथ-साथ ऑपरेशनल कमियों की पहचान भी की जाती है। मॉक ड्रिल के सफल आयोजन से दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस और सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, त्वरित प्रतिक्रिया और आपात स्थिति में समयबद्ध कार्रवाई की क्षमता सामने आई। पुलिस का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए इस तरह की तैयारियां आगे भी जारी रहेंगी।

 

Written By: M. Atharuddin Munne Bharti

Edited By : Toshi Shah