पश्चिम बंगाल की राजनीति में सड़क के नाम बदलने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा शहर की प्रमुख सड़क सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने के निर्णय का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने समर्थन किया है। वहीं, इस फैसले पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और मुख्यमंत्री को निशाने पर लिया है।
पवन खेड़ा ने भाजपा की आलोचना
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने रविवार (21 जून, 2026) को सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट साझा करते हुए भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को हसन सुहरावर्दी और हुसैन सुहरावर्दी के बीच का अंतर तक नहीं पता है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि तथ्यों की जानकारी के अभाव में भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी दी प्रतिक्रिया
इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस हसन सुहरावर्दी के नाम पर सड़क का नाम रखा गया था, वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके थे। उनके बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यह पद संभाला था। जयराम रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी भी पहले विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसी ऐतिहासिक जानकारियां राजनीतिक नारों से नहीं सीखी जा सकतीं।
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने X पर कही ये बात
वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम के फैसले को ऐतिहासिक त्रुटि को सुधारने की दिशा में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने X पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि यह निर्णय न्यायसंगत और समयानुकूल है। उनके अनुसार, लंबे समय से शहर की एक महत्वपूर्ण सड़क ऐसे व्यक्ति के नाम पर थी, जिन पर राजनीतिक हितों के लिए सत्ता के दुरुपयोग और निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं।
सीएम ने नगर निगम के इस कदम का किया स्वागतॉ
मुख्यमंत्री ने नगर निगम के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे जनभावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप बताया। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सड़क का नाम बदलने का निर्णय इतिहास की गलत व्याख्या पर आधारित है और इससे अनावश्यक राजनीतिक विवाद पैदा किया जा रहा है।
Written By Toshi Shah