असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले नंदिता गरलोसा के दल-बदल ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रह चुकीं गरलोसा ने रविवार (22 मार्च) को आधिकारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का दामन थाम लिया। टिकट न मिलने से नाराज़ होकर उन्होंने यह कदम उठाया है और अब वह हाफलोंग सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगी।

नंदिता गरलोसा ने हिमंत बिस्वा सरमा पर लगाया आरोप

कांग्रेस में शामिल होते समय निर्मल लंगथासा भी मौजूद थे, जो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के महासचिव हैं, उन्होंने कहा कि पार्टी को गरलोसा के शामिल होने पर गर्व है, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में दीमा हसाओ क्षेत्र की मजबूती से आवाज उठाई है और अपने सिद्धांतों पर कायम रहीं। लंगथासा ने हिमंत बिस्वा सरमा पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी जमीनों को बड़ी कंपनियों को सौंपने में अधिक रुचि रखती है, जिसके कारण गरलोसा को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने गरलोसा से की थी बात

इस बार बीजेपी ने हाफलोंग सीट से गरलोसा का टिकट काटकर रुपाली लांगथासा को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद गरलोसा ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन मुख्यमंत्री सरमा ने हाफलोंग जाकर उनसे मुलाकात भी की थी, लेकिन बातचीत का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। मुलाकात के कुछ घंटों बाद ही उन्होंने कांग्रेस जॉइन कर ली। बता दें कि असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को निर्धारित है।

  Written By Toshi Shah