नई दिल्ली: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने गुरुवार 15, अक्टूबर को दिल्ली में जारी राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश में सत्ता परिवर्तन की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलने की मांग करना गलत नहीं है। इसके साथ ही प्रशांत भूषण ने केंद्र सरकार पर प्रदर्शनकारियों और युवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आरोप लगाया।
चुनावी लोकतंत्र को कुचलने पर आमादा है मोदी सरकार
प्रशांत भूषण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार देश में चुनावी लोकतंत्र को कुचलने पर आमादा है। यह सरकार बार-बार कहती है कि यह विपक्ष का सत्ता परिवर्तन का अभियान है। इसके साथ ही प्रशांत भूषण ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।
सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करना कोई अपराध नहीं
इस संदर्भ में प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि हम तो बस देश में चुनावी लोकतंत्र को बचाने की अपील कर रहे हैं। देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और युवाओं पर हो रही सख्त कार्रवाई को लेकर सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि, अगर ऐसी बर्बरता जारी रही, तो सत्ता परिवर्तन जरूर होगा। हम सभी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। क्या इसमें कुछ गलत है? सत्ता परिवर्तन हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, और सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करना कोई अपराध नहीं है।
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