प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की हालिया मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका ने ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई देश अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करने में ईरान की मदद करता है, तो उसे भी अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका किसी भी ऐसे प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा, जिसके जरिए ईरान प्रतिबंधों से बचकर अपनी आर्थिक गतिविधियां जारी रख सके, उनके मुताबिक, अगर कोई देश ऐसी वित्तीय या कारोबारी व्यवस्था खड़ी करने में तेहरान की सहायता करता है, जिससे ईरान को धन हासिल हो और उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद के समर्थन या परमाणु हथियार विकसित करने के प्रयासों में किया जाए, तो संबंधित देश पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
भारत-ईरान के बीच नए व्यापार समझौते पर क्या बोले रुबियो?
मार्को रुबियो ने यह टिप्पणी ‘द ब्रायन किलमीड शो’ में एक इंटरव्यू के दौरान की, उनसे भारत और ईरान के बीच संभावित नए व्यापार समझौते तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरानी राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को लेकर सवाल किया गया था। इस पर रुबियो ने कहा कि उन्हें भारत और ईरान के बीच किसी नए ट्रेड डील की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर देश को अपनी विदेश नीति तय करने और दूसरे देशों के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए रखने का अधिकार है, उनका बयान ऐसे वक्त में आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की नीति को और सख्त किया है। अमेरिका पहले ही ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और देशों को सेकेंडरी प्रतिबंधों के संभावित खतरे के बारे में आगाह कर चुका है।
ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर अमेरिका की सख्त नजर
अमेरिकी प्रशासन ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर कदम उठा रहा है। इसी क्रम में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ की शुरुआत की थी। बेसेंट ने इस अभियान को ईरान की बची हुई आर्थिक जीवनरेखाओं को कमजोर करने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर पेश किया था। अमेरिका का मकसद ईरान के उन आर्थिक स्रोतों पर दबाव डालना है, जिनके जरिए तेहरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गतिविधियां जारी रख सकता है।
भारत समेत अन्य देशों को क्या है अमेरिका का संदेश?
रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस बात से अवगत है कि दुनिया के कई देश ईरान के साथ संपर्क और संबंध बनाए हुए हैं, उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी अधिकारियों ने खुद अतीत में ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत और संपर्क किया है। हालांकि, उन्होंने राजनयिक संपर्क और आर्थिक सहयोग के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन की एक सीमा तय है, उनके अनुसार, किसी भी देश को ऐसी व्यवस्था बनाने में ईरान की सहायता नहीं करनी चाहिए, जिसके माध्यम से वह अमेरिकी प्रतिबंधों से बचकर पैसा कमाए और बाद में उस धन का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों के समर्थन या परमाणु हथियारों से जुड़ी गतिविधियों के लिए करे। रुबियो ने संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका संबंधित देश के खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
बिश्केक में हुई थी मोदी और पेजेशकियन की बैठक
मार्को रुबियो की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच बिश्केक में हुई मुलाकात के बाद सामने आई है। दोनों नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से इतर बैठक की थी। इस मुलाकात के दौरान भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार को बढ़ाने के साथ-साथ द्विपक्षीय कारोबार में नए क्षेत्रों को शामिल करने और उसे अधिक विविध बनाने की संभावनाओं पर विचार किया। बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति भी चर्चा का हिस्सा रही। इसके अलावा वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों नेताओं ने बातचीत की। ऐसे में रुबियो की चेतावनी को भारत सहित उन देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो ईरान के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखते हुए अमेरिका की प्रतिबंध नीति के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।
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