Himanta Sarma on Brics Summit 2026: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बने तनाव के बीच BRICS की दुनिया को नेतृत्व देने की एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन शांति, स्थिरता और वैश्विक खुशहाली के लिए ठोस कदम उठाएगा।

भारत की अध्यक्षता को बताया बड़ी उपलब्धि

सरमा ने भारत द्वारा 18वें BRICS समिट की मेजबानी को बड़ी उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की BRICS अध्यक्षता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने भरोसा जताया कि BRICS शांति और समृद्धि के लिए एक स्पष्ट एक्शन प्लान तैयार करेगा। भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS समिट की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। भारत की 2026 की अध्यक्षता की थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” है। इसके तहत विकास, टिकाऊपन और नवाचार को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है।

ईरानी राष्ट्रपति दिल्ली पहुंचे

इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन शुक्रवार को BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करने की भी संभावना है। तेहरान से रवाना होने से पहले पेजेशकियन ने कहा कि एकतरफा सोच का मुकाबला करने में BRICS की अहम भूमिका है। उन्होंने आर्थिक, वित्तीय, औद्योगिक और व्यापारिक चुनौतियों से निपटने के लिए नए तरीकों की जरूरत पर जोर दिया।

डॉलर पर निर्भरता घटाने पर जोर

पेजेशकियन के मुताबिक BRICS सदस्य देशों को अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाशने में मदद कर सकता है। भारत और ईरान लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ BRICS और शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करते रहे हैं।

ये भी पढ़ें:  715 KM Range और चंद सेकंड में 100 की रफ्तार! क्यों खास है ये Luxury Car?

ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर नजर

BRICS में वर्तमान में 11 देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और UAE शामिल हैं। संगठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।

नई दिल्ली समिट में वैश्विक आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, तकनीक, विकास, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता वाले इस सम्मेलन से वैश्विक संकटों पर सामूहिक प्रतिक्रिया और बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।