नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही Flydubai की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को हुई घटना के बाद विमान सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। फ्लाइट के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर उसके ही को-पायलट ने कॉकपिट में हमला कर दिया। इसके बाद विमान अचानक हजारों फीट नीचे चला गया। यात्रियों और क्रू की मदद से हमलावर को काबू किया गया और विमान की सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान में 182 लोग सवार थे।

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि ओमान का नागरिक हमाम अल-हमामी आखिर इजरायल जाने वाली फ्लाइट का को-पायलट कैसे बना? दूसरा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान जैसे ऐसे देशों के नागरिक, जिनके साथ भारत के रिश्ते बेहद संवेदनशील हैं, भारतीय विमान कंपनियों में पायलट बनकर विमान उड़ा सकते हैं? आइए दोनों सवालों को आसान भाषा में समझते हैं।

पहले समझिए Flydubai फ्लाइट में क्या हुआ?

Flydubai की फ्लाइट FZ1073 ने दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। विमान Boeing 737 MAX 8 था और उसमें 174 यात्री तथा 8 क्रू सदस्य यानी कुल 182 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट में को-पायलट हमाम अल-हमामी ने कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया। UAE की जांच एजेंसी के मुताबिक हमले में कॉकपिट में मौजूद crash axe का इस्तेमाल किया गया और को-पायलट ने विमान के नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश की।

हमले के दौरान विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर था। इसके बाद विमान कुछ ही समय में करीब 16,600 फीट नीचे चला गया। फ्लाइट ने emergency signals भी दिए। कैप्टन स्मित मच्छर गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू किया। विमान में मौजूद दो अन्य Flydubai पायलटों ने भी कॉकपिट में पहुंचकर विमान को संभालने में मदद की। आखिरकार विमान की तबुक, सऊदी अरब में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग हुई।

कौन है हमाम अल-हमामी?

जांच और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हमाम अल-हमामी ओमान का नागरिक है। रिपोर्टों में बताया गया है कि उसका जन्म UAE में हुआ था। उसके पिता ओमानी और मां सीरियाई बताई गई हैं। उसकी पिछली एविएशन हिस्ट्री अब जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है। सबसे अहम जानकारी यह सामने आई है कि वह पहले Oman Air के साथ पायलट ट्रेनिंग से जुड़ा था। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक बाद में उसे उड़ान भरने से रोक दिया गया था, क्योंकि उसके कथित तौर पर चरमपंथी विचारों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उसे फ्लाइंग ड्यूटी से हटाकर प्रशासनिक काम दिया गया था।

इसके बाद वह Flydubai के साथ जुड़ा और वहां को-पायलट के तौर पर काम करने लगा। यही वह बिंदु है जिसने अंतरराष्ट्रीय विमान सुरक्षा से जुड़े सवालों को जन्म दिया है—अगर किसी देश में किसी व्यक्ति को सुरक्षा चिंताओं के कारण उड़ान से हटाया गया था, तो दूसरे देश की एयरलाइन में उसकी नियुक्ति के समय उस जानकारी का कितना हिस्सा उपलब्ध था और उसकी जांच कैसे हुई?

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि Flydubai की नियुक्ति प्रक्रिया में निश्चित रूप से कोई नियम टूटा था। UAE के नेतृत्व में जांच चल रही है और अलग-अलग देशों की एजेंसियां उसके पिछले रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही हैं।

फिर ओमान का नागरिक इजरायल जाने वाली फ्लाइट में कैसे पहुंच गया?

यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि ओमान और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में एक ओमानी नागरिक का इजरायल जाने वाली कमर्शियल फ्लाइट के कॉकपिट में को-पायलट के रूप में होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। किसी व्यक्ति की नागरिकता और उसके किसी विमान में काम करने की अनुमति एक ही चीज नहीं होती। Flydubai UAE की एयरलाइन है और यह फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी। यानी अल-हमामी Flydubai के कर्मचारी के तौर पर विमान उड़ा रहा था, न कि ओमान की ओर से किसी सरकारी या आधिकारिक मिशन पर।

इजरायल जाने वाली विदेशी एयरलाइंस के यात्रियों और क्रू की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। 2023 में इजरायल ने एयरलाइंस से यात्रियों और क्रू की एडवांस जानकारी लेने के लिए राष्ट्रीय passenger data analysis system की व्यवस्था की थी। इसमें पहचान, नागरिकता और यात्रा दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। इस जानकारी तक सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की पहुंच भी कानूनी प्रावधानों के तहत हो सकती है।

क्या पाकिस्तान का पायलट भारत में विमान उड़ा सकता है?

अब उस सवाल पर आते हैं जिसने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा पैदा की है—क्या पाकिस्तान का नागरिक भारत में विमान उड़ा सकता है? इसका जवाब सीधा ‘हां’ या ‘नहीं’ कहने से पहले यह समझना जरूरी है कि विमान उड़ाने के लिए पायलट की नागरिकता, लाइसेंस, एयरलाइन का रोजगार, विमान का रजिस्ट्रेशन और संबंधित देश के aviation-security rules अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं।

भारत में किसी भारतीय एयरलाइन के विमान को उड़ाने के लिए पायलट को संबंधित भारतीय विमानन नियमों और DGCA की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। विदेशी पायलटों के मामले में भी लाइसेंस और competency से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं होती हैं। DGCA के दस्तावेजों में विदेशी पायलट के लाइसेंस की वैधता और उसकी योग्यता की जांच, competency assessment और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं का उल्लेख मिलता है।

इसका मतलब यह है कि सिर्फ किसी विदेशी देश का नागरिक होना अपने आप में पायलट को भारत में विमान उड़ाने की अनुमति नहीं देता। उसे भारतीय नियमों और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकृत होना पड़ता है।

लेकिन यहां पाकिस्तानी नागरिकता का मामला सामान्य विदेशी पायलट से अलग संवेदनशीलता रखता है। भारत-पाकिस्तान संबंधों और मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण किसी पाकिस्तानी नागरिक को भारतीय एयरलाइन के लिए पायलट के रूप में नियुक्त करने का सवाल केवल सामान्य aviation licensing का मुद्दा नहीं है। इसमें सरकारी सुरक्षा मंजूरी और लागू प्रतिबंधों या नीतियों को भी देखना होगा।

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे इस दावे को कि “पाकिस्तानी पायलट आराम से भारत में विमान उड़ा सकते हैं”, सीधे तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। वहीं यह कहना भी सही नहीं होगा कि हर परिस्थिति में किसी पाकिस्तानी नागरिक का विमान उड़ाना पूरी तरह असंभव है। मामला इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किस एयरलाइन के लिए, किस विमान को, किस क्षेत्र में और किस लाइसेंस/अनुमति के तहत उड़ाता है।

क्या विदेशी एयरलाइन का पाकिस्तानी पायलट भारत के ऊपर से विमान उड़ा सकता है?

किसी विमान का भारतीय एयरस्पेस से गुजरना और किसी पायलट का भारतीय एयरलाइन में नौकरी करना एक ही बात नहीं है। अंतरराष्ट्रीय विमान संचालन में विमान अलग-अलग देशों के एयरस्पेस से गुजर सकते हैं और इसके लिए संबंधित एयर ट्रैफिक कंट्रोल तथा अंतरराष्ट्रीय aviation rules लागू होते हैं।

इसलिए अगर किसी विदेशी एयरलाइन के विमान में अलग राष्ट्रीयता का पायलट है, तो केवल पायलट की नागरिकता के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि विमान भारत के एयरस्पेस में प्रवेश ही नहीं कर सकता। एयरस्पेस की अनुमति, flight plan, bilateral arrangements, NOTAMs और सुरक्षा नियम अलग स्तर पर लागू होते हैं।

क्या अल-हमामी का मकसद विमान को इजरायल में क्रैश करना था?

यह इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और अभी भी जांच के दायरे में रहने वाला सवाल है। UAE के अधिकारियों ने घटना को आतंकवादी कृत्य की कोशिश बताया है। जांच में यह सामने आया कि अल-हमामी ने कैप्टन पर हमला किया और विमान के नियंत्रण को अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इसके बाद विमान ने खतरनाक तरीके से ऊंचाई खोई। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसका इरादा विमान को इजरायल में क्रैश करने का था। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा है कि जांच इस बात पर हो रही है कि वह अकेले काम कर रहा था या किसी के निर्देश पर। लेकिन अभी तक यह अंतिम रूप से साबित नहीं हुआ है कि उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था या उसके पीछे कोई संगठन था।

यही वजह है कि खबर में “विमान क्रैश करने का इरादा था” को अंतिम तथ्य की तरह लिखना सही नहीं होगा। इसे जांचकर्ताओं के सामने मौजूद एक संभावित मकसद के तौर पर ही पेश किया जाना चाहिए।

क्या उसका किसी आतंकी संगठन से संबंध था?

अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में उसके किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह अकेले काम कर रहा था या किसी नेटवर्क के संपर्क में था। उसके पुराने रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों, विदेश में बिताए समय, पूर्व नौकरी और एयरलाइंस में भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां भी उसके वहां बिताए समय और संभावित संपर्कों की जांच कर रही हैं।

यानी अभी तीन बातें अलग-अलग रखनी जरूरी हैं—उस पर विमान में हमला करने का आरोप है, UAE ने घटना को आतंकवादी कृत्य की कोशिश बताया है और उसका कथित उद्देश्य विमान को नुकसान पहुंचाना हो सकता है; लेकिन किसी आतंकी संगठन से उसके संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल: सुरक्षा जांच में चूक कहां हुई?

इस घटना ने aviation security में एक पुराने लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सवाल को फिर सामने ला दिया है—क्या सिर्फ यात्री की सुरक्षा जांच पर्याप्त है, या एयरलाइन के कर्मचारियों और पायलटों की पृष्ठभूमि की भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा जांच होनी चाहिए? पायलट को विमान के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी कॉकपिट तक सीधी पहुंच होती है। इसलिए उसे ‘insider threat’ के नजरिए से भी देखा जाता है। अगर किसी पायलट को पहले सुरक्षा कारणों से उड़ान से हटाया गया हो और बाद में वह किसी दूसरी एयरलाइन में पायलट बन जाए, तो अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

Flydubai मामले में यही सवाल जांच का केंद्र बन गया है। क्या Oman Air से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं की जानकारी Flydubai तक पहुंची थी? अगर नहीं पहुंची तो क्यों? और अगर पहुंची थी तो उसे भर्ती प्रक्रिया में कैसे देखा गया? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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