Explainer: मशहूर यूट्यूबर Dhruv Rathee की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने उनके खिलाफ 24 घंटे के भीतर 2 अलग-अलग मानहानि मामलों में समन जारी किए हैं। यह कानूनी कार्रवाई तब हुई है जब वे वर्तमान में एक विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में भारत आए हुए हैं। यह समन ध्रुव राठी की अपलोड की गई वीडियो के आधार पर जारी किया गया है।

जिसमें यूट्यूबर ध्रुव राठी ने दावा किया था कि भगवान श्री राम और माता सीता अपने वनवास के दौरान मांस और मदिरा का सेवन करते थे।यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ भाजपा आईटी सेल के सदस्य विकास पांडे द्वारा "भाजपा आईटी सेल पार्ट 2" नामक वीडियो को लेकर दायर किए गए 2018 के आपराधिक मानहानि मामले में भी समन जारी हुआ।

क्या है पुराना मामला?

I Support Narendra Modi' पेज के संस्थापक और बीजेपी समर्थक विकास पांडे ने 2018 में ध्रुव राठी के 'BJP IT Cell Part 2' नामक वीडियो को लेकर आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था। वीडियो में राठी ने आरोप लगाया था कि विकास पांडे ने एक मध्यस्थ के जरिए महावीर प्रसाद नाम के शख्स को 50 लाख की रिश्वत देने की कोशिश की थी, जिससे वह बीजेपी आईटी सेल के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने वाले आरोप वापस ले ले। विकास पांडे ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए केस दर्ज कराया था।

क्या हिंदू गोमांस खा सकते हैं?

सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अमिता सचदेवा और अन्य याचिकाकर्ताओं ने "क्या हिंदू गोमांस खा सकते हैं?" शीर्षक वाले राम-सीता के वीडियो को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। जहां ध्रुव राठी को इस तरह की वीडियो बनाने, अपलोड करने से रोकने के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की।

दरअसल ध्रुव राठी ने जो वीडियो अपलोड किया था उसमें दावा किया गया था कि भगवान श्री राम और माता सीता ने अपने वनवास के दौरान मांस और शराब का सेवन किया था। याचिकाकर्ताओं ने वीडियो को दिल्ली हाईकोर्ट में उठाकर हिंदूओं की आस्था से खिलवाड़ बताया। इसके साथ ही भारत सरकार को वीडियो हटाने का निर्देश दिया।

15 जुलाई 2026 को भारत सरकार ने यूट्यूब को वीडियो हटाने का निर्देश दिया और याचिका का निपटारा करा। लेकिन याचिका के निपटारे के कुछ देर बाद ही किसी ने उस 21 मिनट के वीडियो से 3 मिनट का एक अंश निकालकर उसे फिरसेअपलोड कर दिया।

एडवोकेट सचदेवा के मुताबिक याचिकाकर्ताओं ने फिर से हाईकोर्ट का रूख किया। जिसके बाद ध्रुव राठी के खिलाफ नई कानूनी कार्यवाही फिर से करने की स्वतंत्रता मिली। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद साकेत कोर्ट में माननीय जिला न्यायाधीश के समक्ष मानहानि के लिए याचिका दी गई। निषेधाज्ञा और हर्जाने की मांग करते हुए केस दर्ज किया गया।

5 नवंबर तक सुनवाई स्थगित

सचदेवा ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील मकरंद नटकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए, लेकिन तकनीकी परेशानी की वजह से वह दलीलें पूरी नहीं कर पाए। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 5 नवंबर तक स्थगित कर दी है। शिकायतकर्ताओं ने खुद को हिंदू श्रद्धालु बताकर वीडियो से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है।

मुकदमे में गूगल को एक तरफा अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की भी मांग हुई। केस की सुनवाई के दौरान यूआरएल की सूचना और सत्यापन के बाद वीडियो या उससे मिलते-जुलते किसी भी वीडियो को पुनर्स्थापित करने, होस्ट करने, अपलोड करने, साझा करने या प्रसारित करने से रोकने का आदेश दिया गया है।

2018 के मानहानि मामले में जारी हुआ नया समन

दिल्ली की एक कोर्ट ने भाजपा आईटी सेल के सदस्य विकास पांडे द्वारा साल 2018 में दायर की गई मानहानि मामले की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने ध्रुव राठी को नए सिरे से समन जारी किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया है कि राठी को समन भेजने के प्रयास कई वर्षों से जारी थे।

क्या बोले न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन पांडे

न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन पांडे की नई समन जारी करने की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। 12 अक्टूबर को कोर्ट ने कहा था कि, उपलब्ध रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता पिछले कई वर्षों से आरोपी ध्रुव राठी को समन भेजने का प्रयास कर रहा है। पांडे की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता समक्ष शर्मा ने बताया कि राठी आमतौर पर ऑस्ट्रिया में रहते हैं और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए भारत आए थे।

नए सिरे से जारी किया समन

इस बात का भी तर्क दिया गया कि आरोपियों को समन तामील कराने के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नए समन जारी करना जरूरी है। कोर्ट ने दस्ती तामील के जरिए नए समन भेजने का आदेश दिया। इसमें शिकायतकर्ता को समन तामील कराने वाले के साथ जाने की इजाजत दी गई। राठी को उनके गुरुग्राम स्थित आवास पर व्यक्तिगत रूप से समन भेजा गया। 2019 से उन्हें समन भेजने की कोशिश जारी थी। राठी को दिए गए नोटिस के बारे में बात करते हुए पांडे ने कहा, कोर्ट का समन ध्रुव राठी के घर के बाहर चिपकाया गया है क्योंकि वह बाहर नहीं आ रहे थे।

घर के बाहर भी चिपकाए थे नोटिस

यह मामला 8 साल पहले का है जब ध्रुव राठी ने लगभग 3 वीडियो बनाकर आरोप लगाया था कि मैंने किसी को उनके खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने के लिए 50 लाख रुपये की पेशकश की थी। जब अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट और रीट्वीट करके इस फर्जी खबर को फैलाया, तो मैंने केजरीवाल और ध्रुव राठी दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। अरविंद केजरीवाल ने माफी मांग ली, लेकिन ध्रुव राठी कभी अदालत में पेश नहीं हुए। नतीजतन, नोटिस और समन जारी किए गए। जिन्हें मेरे वकील ने उनके गुरुग्राम स्थित घर के बाहर चिपका दिया।

अरविंद केजरीवाल ने वीडियो किया था रिट्वीट

इस मामले से आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी अछुते नहीं रहे। केजरीवाल ने भी इस वायरल वीडियो को रीट्वीट किया था। यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। फरवरी 2024 में केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने इसे रीट्वीट करके गलती की थी। यह मामला उस समय हाईलाइट हुआ जब दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने 10 अक्टूबर को सेक्टर 56 स्थित उनके आवास से राठी को हिरासत में लिया था।

प्रोटेस्ट में शामिल होने पहुंचे भारत

राठी जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले थे। उन्हें 22 घंटे बाद रिहा कर दिया गया था। यह गिरफ्तारी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे मुख्य न्यायिक परिषद के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान हुई। प्रदर्शनों के दौरान व्यापक सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, यातायात प्रतिबंध और प्रदर्शनकारियों की हिरासत देखी गई।

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