नई दिल्ली : दिल्ली में मंगलवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) ने मानव शृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया। वामपंथी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तेज किया जाएगा।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर को फिर से बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिए उचित स्थान मिलना चाहिए।
सीपीआई नेता एनी राजा ने भी SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस प्रक्रिया को रोकना चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए।
1 नवंबर को बड़ी रैली का ऐलान
सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह प्रदर्शन जारी आंदोलन का हिस्सा है और आने वाले दिनों में इसे और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी। इसके अलावा विरोध मार्च और अन्य कार्यक्रम भी जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि वामपंथी दल SIR के मुद्दे पर अपना विरोध लगातार दर्ज कराते रहेंगे।
SIR पर चुनाव आयोग के फैसले को लेकर सवाल
इससे पहले सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे पर सवाल उठाए थे। आयोग ने SIR से संबंधित अपने फैसले का बचाव करते हुए इसे तीनों चुनाव आयुक्तों का सर्वसम्मत निर्णय बताया था।
कुमार ने कहा कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया हो या बहुमत के आधार पर, इससे उसकी वैधता और स्वीकार्यता का सवाल खत्म नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के प्रावधानों के खिलाफ है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि SIR प्रक्रिया की आवश्यकता क्यों पड़ी और फॉर्म-6 में बदलाव करने का निर्देश किसने दिया। उनके अनुसार, निर्वाचन आयोग ने फैसले से जुड़ी कार्यवाही का पूरा विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। कुमार ने आरोप लगाया कि आयोग की ओर से सर्वसम्मति का तर्क देकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव किया जा रहा है।
आगे भी जारी रहेगा विरोध
वामपंथी दलों ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया को लेकर उनका विरोध जारी रहेगा। सीपीआई और सीपीएम के नेताओं ने चुनाव आयोग से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने, SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई है।
हालांकि, SIR को लेकर लगाए गए आरोप राजनीतिक दलों के दावे हैं। इन आरोपों और चुनाव आयोग के रुख से संबंधित कानूनी तथा तथ्यात्मक पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
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