दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को बारामूला सांसद अब्दुल राशिद शेख की जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया। NIA से जुड़े कथित आतंकी फंडिंग मामले में राशिद अगस्त 2019 से जेल में बंद हैं।

यूएपीए और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज

3 नवंबर 2026 को कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अब सभी की नजरें अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े NIA के एक मामले में राशिद को हिरासत में है। उसे अगस्त 2019 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर यूएपीए और अन्य धाराओं के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया है। एनआईए ने उसे 2017 में दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया था।

दलीले सुनने के बाद फैसला रखा सुरक्षित

न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने अब्दुल राशिद शेख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और एनआईए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।

7 साल से हिरासत में है राशिद

वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और विख्यात ओबेरॉय अब्दुल राशिद शेख उर्फ ​​राशिद इंजीनियर की ओर से पेश हुए। उन्होंने बताया कि शेख सात साल से हिरासत में है। एक अन्य आरोपी शब्बीर अहमद शाह, जिस पर समान अपराधों का आरोप है, को मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत दे दी गई थी।

दिए थे भारत विरोधी भाषण

राशिद की जमानत याचिका का एनआईए ने विरोध किया क्योंकि उसने भारत के खिलाफ विवादित भाषण दिए। भारत विरोधी गतिविधियों और 2 संरक्षित गवाहों का समर्थन किया और अंतरिम जमानत पर बाहर रहते हुए गवाहों से मुलाकात की।

राशिद के वकील ने क्या कहा?

अभियुक्त के वरिष्ठ वकील ने बताया कि सभी सार्वजनिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है। वह भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं था। यह भी बताया गया कि अब्दुल राशिद शेख का नाम मुख्य आरोपपत्र में नहीं था। उन्हें 2019 में गिरफ्तार किया गया था और एनआईए द्वारा दायर दूसरे पूरक आरोपपत्र में उनका नाम शामिल किया गया था।

राशिद निर्वाचित सांसद हैं और भारत के संविधान में अपनी आस्था भी दिखाई है। सार्वजनिक गवाहों से मिलने और उन्हें प्रभावित करने का कोई सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि वे या तो उनकी पार्टी के समर्थक थे या उनके आधिकारिक कर्मचारी। राशिद ने पत्थरबाजी में घायल हुए लोगों को अपना समर्थन दिया। वरिष्ठ वकील ने कहा कि एक राजनेता के रूप में यह उनका कर्तव्य था।

विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी गई थी और उसके बाद सांसद के रूप में शपथ लेने और संसद सत्रों में भाग लेने के लिए उन्हें पैरोल पर रिहा किया गया था। राशिद के पिता के निधन के बाद उन्हें अंतरिम जमानत भी दी गई थी। 

भारत विरोधी दिया था भाषण

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और विशेष लोक अभियोजक अक्षय मलिक ने एनआईए की ओर से अब्दुल राशिद शेख की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि उन्होंने भारत विरोधी भाषण दिया था। राशिद ने गवाहों से मुलाकात की और उन्हें प्रभावित किया। दो गवाह मुकर गए और उनके खिलाफ बयान देने से इनकार कर दिया। यह भी बताया गया कि केवल सार्वजनिक गवाहों से ही पूछताछ की गई है।


एनआईए के अधिकारियों के गवाहों से अभी पूछताछ की जानी बाकी है। जमानत याचिका का विरोध करते हुए एनआईए ने आरोप-पत्र संबंधी आदेश और मुकदमे के दौरान गवाही देने वाले गवाहों के बयानों का हवाला दिया। यह मामला आरोपियों को जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं है।

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