कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को हिरासत से रिहा कर दिया गया है। तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहाई मिली। रिहाई के तुरंत बाद CJP ने आज दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान किया है।
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।” वहीं, पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि नेताओं को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया है। रत्ना सिंह ने पोस्ट में लिखा, “शर्त- एक साल तक शांति भंग नहीं होनी चाहिए।”
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया था
CJP के तीनों नेताओं को शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। रत्ना सिंह ने X पर पोस्ट कर उनकी रिहाई की पुष्टि की। अधिवक्ता सौतिक बनर्जी ने भी बताया कि अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को रिहा कर दिया गया है और वे वहां से जा सकते हैं।
CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने शनिवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया था। उन्होंने दावा किया था कि मुंबई से दिल्ली पहुंचे उनके विमान के उतरने के बाद पुलिसकर्मियों ने विमान के भीतर ही उन्हें और उनके साथियों को हिरासत में लेने की कोशिश की। वीडियो में दिपके दिल्ली पुलिस पर विमान के अंदर आकर गिरफ्तारी की कोशिश करने का आरोप लगाते सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने की कार्रवाई बताते हुए केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा था।
प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं 20 से ज्यादा FIR
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 10 अक्टूबर को जबरन प्रदर्शन करने की कोशिशों के संबंध में 20 से अधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने जैसे आरोप शामिल हैं। मामले में चार लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी दी गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो का हवाला देते हुए पुलिस ने बताया कि यह 10 अक्टूबर का है। वीडियो में सिविक सेंटर के पास कुछ लोगों पर प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करने का आरोप है।
रत्ना सिंह की याचिका अदालत ने की खारिज
इससे पहले शनिवार को दिल्ली की एक अदालत ने CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR या गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि याचिका उचित हलफनामे के साथ दाखिल नहीं की गई थी और इसमें उस विशिष्ट लोक सेवक का नाम भी नहीं था, जिसके खिलाफ आरोप लगाए गए थे। इसी आधार पर अदालत ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए रत्ना सिंह को कथित तौर पर गलत तरीके से हिरासत में रखा गया था। उन्होंने मामले में स्टेटस रिपोर्ट मंगाने की मांग भी की थी।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिरासत
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कई प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, CPI(M) नेता पिनराई विजयन और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी जैसे प्रमुख विपक्षी नेता भी शामिल थे। CJP नेताओं की रिहाई के बाद अब सभी की नजरें दोपहर 2 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जिसमें पार्टी प्रदर्शन और हिरासत की कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रख सकती है।
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