नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) नेता वृंदा करात ने रविवार 4, अक्टूबर को महिला पत्रकारों द्वारा दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायत को संभालने के तरीके को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना की। वृंदा करात ने दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने से पहले उत्पीड़ित महिला पत्रकारों से वीडियो सबूत मांगने के लिए पुलिस अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है।

पुलिस से वीडियो सबूत मांगने जाने को कानून का उल्लंघन बताया

CPI(M) नेता वृंदा करात ने पुलिस द्वारा वीडियो सबूत मांगने जाने को कानून का उल्लंघन बताया। इसके साथ ही वृंदा करात ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए तुरंत कानूनी कार्रवाई करने की मांग की और गुस्सा भी जताया। वृंदा करात ने FIR दर्ज करने को लेकर पुलिस की शुरुआती आनाकानी और सबूत मांगे जाने की बात पर पुलिस अधिकारियों की निंदा करते हुए कहा कि, अब, जब एक पत्रकार के साथ यौन उत्पीड़न हो रहा है और दिल्ली पुलिस उसे बचाने की कोशिश कर रही है एवं उससे वीडियो दिखाने के लिए कहा जा रहा है। यानी अगर आपके पास वीडियो है, तो हम FIR दर्ज करेंगे। तो कानून का क्या मतलब है?

अगर कोई परेशान कर रहा है तो वीडियो दिखाना पड़ेगा

वृंदा करात ने दिल्ली पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि, अगर कोई तुम्हें परेशान कर रहा है, तो आपको पहले अपना वीडियो दिखाना पड़ेगा। यह कानून का कैसा तरीका है? यह बहुत गलत है। दअसल, यह विवाद 3 अक्टूबर को तब शुरू हुआ जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और दूसरे ग्रुप्स ने नेशनल कैपिटल में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान AISA प्रेसिडेंट नेहा बोरा के साथ सीनियर वकील प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल समेत कई प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर के पास पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की।

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