बिहार: त्यौहारों का समय आते ही लोग अपने-अपने घर जाते है। ऐसे में अगर ट्रेन केंसिल हो जाए तो आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बिहार से ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। जहां 21 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक बिहार के मोकामा इलाके में रेलवे का बड़ा मेगा ब्लॉक रहने वाला है। इस दौरान 50 से ज्यादा ट्रेनें अलग-अलग तारीखों पर रद्द रहेंगी और कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट में बदलाव भी किया जाएगा। वहीं कुछ ट्रेनों को उनके सामान्य गंतव्य से पहले ही समाप्त किया जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनें अपने तय शुरुआती स्टेशन के बजाय दूसरे स्टेशन से चलेंगी।
इसका असर सिर्फ बिहार के यात्रियों पर नहीं पड़ेगा। हावड़ा, कोलकाता, पटना, जयनगर, मालदा, भागलपुर, रक्सौल, दरभंगा, सीतामढ़ी, आनंद विहार और दूसरे शहरों के बीच चलने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनें भी प्रभावित होंगी। ऐसे में अगर आपने 21 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच का टिकट ले रखा है तो स्टेशन जाने से पहले ट्रेन का अपडेट जरूर जान लें।
क्यों थमीं ट्रेनें?
ट्रेनों के कैंसिल होने की वजह कोई सामान्य परिचालन समस्या नहीं है। बल्कि मोकामा के पास गंगा नदी पर पुराने राजेंद्र पुल के समानांतर नया डबल रेल लाइन पुल तैयार किया गया है। अब इस नए पुल को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का काम किया जाना है। इसके लिए राजेंद्र पुल, ऊपरी हथीदह जंक्शन, टाल जंक्शन, रामपुर डुमरा और दिनकर ग्राम सिमरिया के साथ-साथ सिमरिया-बरौनी मुख्य रेल लाइन से कनेक्शन तैयार किया जाएगा। इस दौरान प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग यानी NI कार्य होगा।
रेलवे ट्रैक और सिग्नलिंग से जुड़े इस तरह के काम में ट्रेनों का सामान्य परिचालन बनाए रखना संभव नहीं होता। इसलिए रेलवे को कुछ सेवाएं रोकनी पड़ती हैं, कुछ को दूसरे रास्ते से चलाना पड़ता है और कुछ को बीच के स्टेशन पर ही खत्म करना पड़ता है।
मोकामा में क्या हो रहा है?
बता दें कि काम नए पुल को रेलवे के मौजूदा नेटवर्क से जोड़ने का है। नया पुल बन जाने के बाद सिर्फ उस पर ट्रैक तैयार होना काफी नहीं है। उसे आसपास की रेल लाइनों, पॉइंट और सिग्नलिंग सिस्टम से जोड़ना भी जरूरी है। यही काम इस मेगा ब्लॉक के दौरान किया जाएगा।
रेलवे के लिए यह कनेक्टिविटी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नए डबल रेल पुल के इस्तेमाल से इस रेलखंड पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। यानी अभी कुछ दिनों तक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होगा, लेकिन काम पूरा होने के बाद इस रूट पर रेल संचालन को ज्यादा क्षमता मिल सकती है।
राजेंद्र पुल क्यों हैं खास
मोकामा-बरौनी के बीच गंगा नदी पर बना राजेंद्र पुल बिहार के महत्वपूर्ण रेल संपर्कों में से एक है। इस रूट से बिहार के कई हिस्से पूर्वी भारत के बड़े शहरों से जुड़ते हैं। पुराने रेल पुल के समानांतर नया डबल रेल लाइन पुल तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण रेलखंड की क्षमता को बढ़ाना है।
यही वजह है कि पुल को मौजूदा नेटवर्क से जोड़ने का काम कोई छोटा तकनीकी काम नहीं है। इसके लिए कई स्टेशनों और रेल लाइनों के बीच कनेक्शन तैयार करना पड़ रहा है और इसी कारण इतने बड़े स्तर पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हो रहा है।
आंकड़ों में इतना फर्क क्यों?
एक हालिया रिपोर्ट में 50 से ज्यादा ट्रेनें रद्द होने की बात कही गई है। वहीं पूरे मेगा ब्लॉक की विस्तृत जानकारी में 339 ट्रेन सेवाएं रद्द, 384 का रूट डायवर्ट, 56 का आंशिक समापन और 67 का आंशिक प्रारंभ बताया गया है। वही एक अन्य रिपोर्ट में इसी आंकड़े को 338 रद्द और 382 परिवर्तित सेवाओं के रूप में भी बताया गया है। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में 47 ट्रेनों के रद्द होने का आंकड़ा भी सामने आया था।
कौन-कौन सी ट्रेनें रद्द
इस मेगा ब्लॉक में कई प्रमुख ट्रेनें प्रभावित हैं। इनमें लंबी दूरी की एक्सप्रेस के साथ पैसेंजर और कई स्पेशल ट्रेनें भी शामिल हैं।
प्रमुख प्रभावित ट्रेनों में:
* 13029/13030 हावड़ा-मोकामा-हावड़ा एक्सप्रेस
* 13031/13032 हावड़ा-जयनगर-जयनगर-हावड़ा एक्सप्रेस
* 13121/13122 कोलकाता-गाजीपुर सिटी एक्सप्रेस
* 13415/13416 मालदा टाउन-पटना एक्सप्रेस
* 15527/15528 जयनगर-पटना एक्सप्रेस
* 13227/13228 सहरसा-राजेंद्र नगर एक्सप्रेस
* 14003/14004 मालदा टाउन-नई दिल्ली एक्सप्रेस
* 13043/13044 हावड़ा-रक्सौल एक्सप्रेस
* 13127/13128 कोलकाता-आरा एक्सप्रेस
इसके अलावा कई स्पेशल और पैसेंजर ट्रेनें भी अलग-अलग तारीखों पर रद्द की गई हैं।
किस तारीख को ज्यादा असर?
रद्द होने वाली सेवाओं की संख्या हर दिन समान नहीं है। उपलब्ध तारीखवार सूची के मुताबिक 20 सितंबर को 6 ट्रेनें, 21 सितंबर को 12, 22 सितंबर को 13, 23 सितंबर को 15, 24 सितंबर को 21, 25 सितंबर को 24, 26 सितंबर को 29 और 27 सितंबर को 31 ट्रेनें रद्द रहने की जानकारी दी गई है। इसके बाद 28 सितंबर को 21, 29 सितंबर को 20, 30 सितंबर को 25, 1 अक्टूबर को 32, 2 अक्टूबर को 32, 3 अक्टूबर को सबसे ज्यादा 36 और 4 अक्टूबर को 21 ट्रेन सेवाएं रद्द रहने की जानकारी सामने आई है।
किन रूटों पर असर?
इसका असर सिर्फ मोकामा तक सीमित नहीं रहेगा। मोकामा-बरौनी कनेक्शन के कारण बिहार से होकर गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होगा। हावड़ा, कोलकाता, जयनगर, रक्सौल, मालदा, पटना, भागलपुर, सीतामढ़ी और दरभंगा से जुड़ी कई ट्रेनें इस बदलाव की वजह से प्रभावित हैं।
यानी अगर आपकी ट्रेन सीधे मोकामा से नहीं भी गुजरती हैं, फिर भी वह उस नेटवर्क से जुड़ी होने के कारण प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि यात्रियों को केवल अपने बोर्डिंग स्टेशन देखकर संतुष्ट नहीं होना चाहिए। ट्रेन का पूरा रूट देखना बेहद जरूरी है।
रूट बदला तो क्या होगा?
रिपोर्टों के मुताबिक दुरंतो, पूर्वा, अकाल तख्त, मौर्य, विभूति और पूर्वांचल एक्सप्रेस समेत कई प्रमुख ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इनमें कई ट्रेनें भागलपुर-साहिबगंज की ओर से डायवर्ट होकर चलेंगी। इसका मतलब है कि ट्रेन चलती रहेगी, लेकिन सामान्य रास्ते से नहीं जाएगी। इससे यात्रा का समय बदल सकता है और कुछ यात्रियों के बोर्डिंग या उतरने वाले स्टेशन भी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ यह देखकर यात्रा की योजना नहीं बनानी चाहिए कि ट्रेन कैंसिल नहीं हुई है।
शॉर्ट टर्मिनेट का मतलब क्या
रेलवे की भाषा में शॉर्ट टर्मिनेट का मतलब है कि ट्रेन अपने सामान्य अंतिम स्टेशन तक नहीं जाएगी। उदाहरण के तौर पर 63571 जसीडीह-मोकामा मेमू को 20 सितंबर से 4 अक्टूबर तक किऊल में ही शॉर्ट टर्मिनेट करने की जानकारी दी गई है। वहीं 63572 मोकामा-जसीडीह मेमू 21 सितंबर से 5 अक्टूबर तक किऊल से शॉर्ट ओरिजिनेट होगी। यानी जिस यात्री को मोकामा तक जाना था, उसे किऊल से आगे जाने के लिए दूसरा विकल्प तलाशना पड़ सकता है।
समय भी बदलेगा?
वहीं सिर्फ कैंसिलेशन और डायवर्जन ही नहीं, बल्कि कुछ ट्रेनों के समय में भी बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक विक्रमशिला एक्सप्रेस 3 अक्टूबर को तीन घंटे देरी से चलेगी। इसके अलावा गोड्डा-राजेंद्र नगर, धनबाद-पटना इंटरसिटी और टाटानगर-बक्सर एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनों को भी री-शेड्यूल किया गया है।
त्योहार में ही क्यों ब्लॉक
यह सवाल सबसे स्वाभाविक है। सितंबर के आखिर और अक्टूबर की शुरुआत में त्योहारों का सीजन शुरू हो जाता है। ऐसे समय में बिहार आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ती है। फिर रेलवे ने इसी समय इतना बड़ा काम क्यों रखा?
इसका मुख्य कारण त्योहार नहीं बल्कि पुल का जरूरी कनेक्शन और NI कार्य है। नए पुल को चालू करने से पहले उसे मौजूदा नेटवर्क से जोड़ना जरूरी है। रेलवे इस काम को पूरा किए बिना नए डबल रेल पुल का पूरा फायदा नहीं उठा सकता। त्योहारों के आसपास होने की वजह से यात्रियों को इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है। लेकिन कैंसिलेशन का मूल कारण त्योहारों की भीड़ नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर का यह तकनीकी काम है।
यात्रियों का क्या होगा?
सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को होगी जिन्होंने पहले से टिकट बुक कर रखा है। ऐसे यात्रियों को सबसे पहले अपनी ट्रेन का नंबर और यात्रा की तारीख चेक करनी होगी। क्योंकि एक ही ट्रेन अलग-अलग तारीखों पर अलग स्थिति में हो सकती है। अगर ट्रेन कैंसिल है तो वैकल्पिक ट्रेन देखनी होगी। अगर रूट बदला है तो यह देखना होगा कि वह आपके स्टेशन पर पहुंचेगी या नहीं। और अगर ट्रेन शॉर्ट टर्मिनेट है तो अंतिम स्टेशन तक पहुंचने के लिए दूसरा साधन भी देखना होगा।
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त्योहारों के लिए रेलवे की तैयारी
अब सवाल है कि जब सितंबर के आखिर में इतनी ट्रेनें प्रभावित होंगी तो आने वाले त्योहारों में यात्रियों का दबाव कैसे संभाला जाएगा?
रेलवे की ओर से त्योहारों के दौरान स्पेशल ट्रेनें और अतिरिक्त फेरे चलाने की तैयारी की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक दिवाली और छठ के दौरान बड़ी संख्या में स्पेशल फेरे चलाने की योजना है। बिहार के लिए दिल्ली, आनंद विहार, चंडीगढ़ और दूसरे शहरों से स्पेशल ट्रेनों की घोषणा भी की जा रही है। इनमें आनंद विहार-मुजफ्फरपुर, आनंद विहार-जोगबनी, चंडीगढ़-पटना और दिल्ली-सीतामढ़ी जैसे रूट शामिल हैं। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को अतिरिक्त ट्रेनों के जरिए संभालना है।
आगे क्या बदलेगा?
मेगा ब्लॉक खत्म होने के बाद सबसे बड़ा फायदा नए डबल रेल पुल के इस्तेमाल से मिलने की उम्मीद है। नया पुल पुराने राजेंद्र पुल के समानांतर बनाया गया है। इसके चालू होने के बाद इस रेलखंड पर अतिरिक्त लाइन उपलब्ध होगी। इससे ट्रेनों के संचालन में लचीलापन बढ़ सकता है और भविष्य में इस रूट पर ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यानी अभी जो काम यात्रियों के लिए परेशानी पैदा कर रहा है, उसका उद्देश्य लंबे समय में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना है।
सफर से पहले ये जरूर करें
अगर आपकी यात्रा 21 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच है तो इन पांच चीजों को जरूर चेक करें।
पहला: ट्रेन नंबर और यात्रा की तारीख दोनों देखें।
दूसरा: ट्रेन कैंसिल है या डायवर्ट, यह जरूर चेक करें।
तीसरा: अगर ट्रेन डायवर्ट है तो देखें कि आपका बोर्डिंग और डेस्टिनेशन स्टेशन उसके नए रूट में है या नहीं।
चौथा: शॉर्ट टर्मिनेशन या शॉर्ट ओरिजिनेशन की जानकारी जरूर देखें।
पांचवां: यात्रा के दिन निकलने से पहले रेलवे के आधिकारिक ट्रेन स्टेटस/139 से अपडेट ले लें।
तो 21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक बिहार में ट्रेनों पर पड़ने वाला यह असर सिर्फ कैंसिलेशन की खबर नहीं है। बल्कि मोकामा के राजेंद्र पुल के समानांतर बने नए डबल रेल पुल को मौजूदा नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्री-NI और NI का काम किया जा रहा है। इसी वजह से अलग-अलग तारीखों पर 50 से ज्यादा ट्रेनें रद्द होने की जानकारी सामने आई है। पूरे मेगा ब्लॉक के व्यापक आंकड़ों में 338-339 ट्रेन सेवाओं के रद्द होने, 384 के रूट बदलने, 56 के आंशिक समापन और 67 के आंशिक प्रारंभ की जानकारी अलग-अलग रिपोर्टों में दी गई है। इसका असर हावड़ा, कोलकाता, पटना, जयनगर, मालदा, रक्सौल, भागलपुर और दूसरे प्रमुख रूटों पर पड़ रहा है। वहीं कुछ ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है और कुछ के समय में बदलाव किया गया है।
त्योहारों के ठीक पहले होने वाले इस काम से यात्रियों को असुविधा जरूर होगी, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य नए रेल पुल को नेटवर्क से जोड़कर रेल क्षमता बढ़ाना है। त्योहारों के दौरान अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों के जरिए भीड़ संभालने की तैयारी की जा रही है।
इसलिए अगर आपकी यात्रा इन तारीखों के बीच है तो सिर्फ टिकट देखकर घर से न निकलें। ट्रेन का ताजा स्टेटस, रूट और अंतिम स्टेशन जरूर चेक करें।
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