ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। ईरान की ओर से इन शर्तों को कतर के जरिए अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाया गया है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में वह सैन्य टकराव के लिए भी तैयार है।

ईरान की सुप्रीम ने कही ये बात

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान लगातार कतर के संपर्क में है। उनके मुताबिक, कतर ने संघर्ष खत्म करने के उद्देश्य से ईरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं और अब ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।

युद्ध रोकने और ईरानी संपत्तियां रिलीज करने की मांग

रेजाई के अनुसार, ईरान की प्रमुख मांगों में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना, विदेशों में रोकी गई ईरानी वित्तीय संपत्तियों को मुक्त करना और नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शामिल है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए तेहरान ने सात शर्तें निर्धारित की हैं।

शर्तों को स्वीकार करना अमेरिका के लिए हितकारी -ईरान

ईरानी अधिकारी ने यह भी दावा किया कि इन शर्तों को स्वीकार करना अमेरिका के हित में होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी धमकियों से ईरान की स्थिति बदलने वाली नहीं है और जरूरत पड़ने पर उनका देश लंबे तथा निर्णायक सैन्य संघर्ष के लिए तैयार है।

कतर और पाकिस्तान कर रहे हैं मध्यस्थता की कोशिश

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत बहाल कराने के लिए कतर और पाकिस्तान सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले महीने एक समझौता ज्ञापन की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों देश तेहरान और वाशिंगटन को फिर से बातचीत की मेज पर लाने के प्रयासों में जुटे हैं।

मध्य पूर्व के देश तनाव घटाने में जुटे

मध्य पूर्व के अन्य देश भी तनाव कम करने और संघर्ष को समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहे हैं। मौजूदा संकट उस समय और गहरा गया था, जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई।

ईरान ने सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने अपनी सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और अन्य सुरक्षा बलों के लिए उच्चतम स्तर का अलर्ट कोड 100 सक्रिय किया है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कैंप डेविड में अपनी सप्ताहांत की छुट्टी समाप्त कर वाशिंगटन लौटने का फैसला किया है।

नेतन्याहू ने अमेरिका दौरा बीच में छोड़ा

इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपनी अमेरिका यात्रा समय से पहले खत्म कर इजरायल लौटने का निर्णय लिया है। मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी दूतावासों की ओर से भी सुरक्षा संबंधी चेतावनियां जारी किए जाने की खबरें सामने आई हैं।

ईरान को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका

मोहसिन रेजाई ने भविष्य में अमेरिका की ओर से एक और हमले की संभावना से इनकार नहीं किया, उन्होंने कहा कि ईरानी सैन्य आकलन में इस तरह की कार्रवाई की आशंका काफी अधिक मानी जा रही है। उनके मुताबिक, ईरान ने पहले के दो दौर के संघर्षों से मिले अनुभव के आधार पर अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है।

ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक ठिकानों को बनाया निशाना

रेजाई ने दावा किया कि ईरान की मौजूदा सैन्य रणनीति में फारस की खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक मौजूद अमेरिकी नौसैनिक संसाधनों को ध्यान में रखा गया है, उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने हाल में एक अमेरिकी नौसैनिक पोत या विमानवाहक पोत के नजदीक बहु-वारहेड एंटी-शिप मिसाइल का परीक्षण किया था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया है।

अमेरिकी सैन्य ठिकानों और कारोबारी हितों पर कार्रवाई की चेतावनी

रेजाई ने कहा कि यदि भविष्य में ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई की जाती है, तो तेहरान की प्रतिक्रिया पहले की तुलना में व्यापक हो सकती है। उनके अनुसार, संभावित जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा अमेरिकी कारोबारी हित और स्थानीय स्तर पर सक्रिय अमेरिकी कंपनियां भी प्रभावित हो सकती हैं। युद्ध के जल्द समाप्त होने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में रेजाई ने कहा कि व्यावहारिक तौर पर संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ईरान की मौजूदा रणनीति टकराव को जल्द से जल्द समाप्त करने की दिशा में है।

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परमाणु नीति को लेकर ईरान का रुख

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रेजाई ने कहा कि देश ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से अलग होने का निर्णय नहीं लिया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की आगे की कार्रवाइयां ईरान को इस विकल्प पर विचार करने के लिए मजबूर कर सकती हैं, उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु नीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। रेजाई के मुताबिक, तेहरान अब भी उस धार्मिक आदेश का पालन कर रहा है, जिसमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर रोक की बात कही गई है।