रक्षाबंधन का त्योहार अब भी प्यार और रिश्तों की मिठास से भरा है, लेकिन बदलती जिंदगी और बढ़ती दूरियों ने इसे मनाने का तरीका बदल दिया है। अब कई भाई-बहन हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी कूरियर, ऑनलाइन गिफ्ट और वीडियो कॉल के जरिए इस रिश्ते को निभा रहे हैं।
दूर रहकर मना रही हैं रक्षाबंधन
दिल्ली में रहने वाली गृहिणी दीप्ति चंद्रा पिछले करीब 20 सालों से अपने भाई से दूर रहकर रक्षाबंधन मना रही हैं। उनका भाई बिहार में रहता है। दीप्ति बताती हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा कमी उस पल की महसूस होती है जब वह खुद भाई की कलाई पर राखी बांधती थीं, साथ बैठकर खाना बनाती थीं और बचपन की यादें ताजा करती थीं।
उन्होंने कहा कि पहले वह राखी कूरियर से भेजती थीं, लेकिन अब ऑनलाइन सुविधाओं के कारण राखी और गिफ्ट भेजना आसान हो गया है। हालांकि, वीडियो कॉल के जरिए जुड़ने के बावजूद त्योहार को आमने-सामने मनाने जैसी गर्माहट महसूस नहीं होती।
दुबई में रहने वाली श्वेतांबरी झा भी करीब 20 सालों से अपने भाई से दूर रक्षाबंधन मना रही हैं। वह बताती हैं कि उन्हें राखी के दौरान होने वाली नोकझोंक, गिफ्ट को लेकर मजाक और भाई-बहन की मस्ती सबसे ज्यादा याद आती है। दूरी के बावजूद वह फोन कॉल और शुभकामनाओं के जरिए इस परंपरा को जारी रखती हैं।
सात समंदर पार रह रहा भाई
अमेरिका में रहने वाली प्रियंम झा पिछले नौ सालों से भारत में रहने वाले अपने भाई से दूर हैं। वह ऑनलाइन राखी खरीदकर भेजती हैं और वीडियो कॉल के जरिए समारोह में शामिल होती हैं। उनका कहना है कि दूरी ने तरीका बदला है, लेकिन रिश्ते की भावनाएं आज भी वैसी ही हैं।
भाई भी इस दूरी को महसूस करते हैं। 1200 किलोमीटर दूर रहने वाले विजय शर्मा बताते हैं कि अब उनकी राखी फ्लिपकार्ट के जरिए पहुंचती है, लेकिन इससे उन्हें बचपन के वो दिन याद आते हैं जब भाई-बहन साथ जाकर राखी खरीदते थे और घर में मिलकर त्योहार मनाते थे।
कूरियर से भेज रहे राखी-मिठाई
दूरी का असर राखी की डिलीवरी पर भी दिखाई दे रहा है। त्योहार के समय राखी, मिठाई, गिफ्ट और पर्सनलाइज्ड सामान के पार्सल की संख्या काफी बढ़ जाती है। दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया तक राखियां भेजी जा रही हैं।
डिलीवरी पर काफी सतर्क रहते हैं कर्मचारी
डिलीवरी कर्मचारियों के मुताबिक, रक्षाबंधन के समय लोग समय पर डिलीवरी को लेकर काफी सतर्क रहते हैं और एक्सप्रेस सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। छोटे शहरों से बड़े शहरों और विदेशों तक भेजे जाने वाले पार्सल अब सिर्फ राखी नहीं, बल्कि भावनाएं और यादें भी पहुंचाते हैं।
दूरी होने पर भावनात्मक कमी महसूस
मनोवैज्ञानिक जान्हवी ठाकुर के अनुसार, भाई-बहन के बीच दूरी होने पर भावनात्मक कमी महसूस होना स्वाभाविक है। राखी बांधना, साथ खाना खाना और परिवार के साथ समय बिताना इस त्योहार की खासियत है, जिसे डिजिटल माध्यम पूरी तरह से नहीं दोहरा सकते।
हालांकि, उनका कहना है कि दूरी रिश्तों को कमजोर नहीं करती। वीडियो कॉल, मैसेज, ऑनलाइन गिफ्ट और नई परंपराएं जैसे साथ में ऑनलाइन गिफ्ट खोलना या हर साल वीडियो कॉल का समय तय करना रिश्ते को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं।
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आज रक्षाबंधन पहले जैसा नहीं रहा, लेकिन एक राखी, एक ऑनलाइन गिफ्ट या एक वीडियो कॉल के जरिए भी भाई-बहन अपने रिश्ते की मिठास बनाए रख रहे हैं। दूरी ने त्योहार मनाने का तरीका बदला है, लेकिन भाई-बहन के प्यार को नहीं।