Health News: नवजात शिशुओं में दिल में छेद की समस्या को नजरअंदाज करना बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि बच्चा दूध पीते समय जल्दी थक जाता है, हांफने लगता है या उसके माथे पर बहुत ज्यादा पसीना आता है, तो माता-पिता को सतर्क हो जाना चाहिए। क्योंकि ये लक्षण जन्मजात हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं। यह समस्या गर्भ में शिशु के दिल के विकास के दौरान उत्पन्न होती है, जब हृदय की संरचना पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती।
दिल के किस हिस्से में होता है छेद?
मानव हृदय में 4 कक्ष होते हैं, जिनमें 2 ऊपरी और 2 निचले हिस्से शामिल हैं। इन कक्षों को अलग करने वाली मांसपेशियों की दीवार को सेप्टम कहा जाता है। इस दीवार में छेद होने पर इसे सेप्टल डिफेक्ट कहते हैं। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं। ऊपरी कक्षों के बीच छेद को एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD), जबकि निचले कक्षों के बीच छेद को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) कहा जाता है।
बच्चों में VSD की समस्या क्यों है अहम?
VSD जन्मजात हृदय दोषों के आम प्रकारों में से एक है। इसमें हृदय के बाएं निचले कक्ष से ऑक्सीजन युक्त रक्त दाएं निचले कक्ष में जा सकता है। इससे फेफड़ों तक सामान्य से अधिक रक्त पहुंचता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि, छोटे छेद कई बार अपने आप बंद हो जाते हैं, जबकि बड़े छेद के लिए उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
वहीं दिल में छेद होने पर बच्चे को दूध पीने में परेशानी, तेजी से सांस लेना, दूध पीते समय पसीना आना, बार-बार सांस का संक्रमण और वजन न बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ गंभीर हृदय दोषों में होंठ या त्वचा नीली भी पड़ सकती है।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे को जल्द बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) जैसी जांच करा सकते हैं। यदि बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो या होंठ नीले पड़ जाएं, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। समय पर पहचान और उचित उपचार से बच्चे के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल संभव है।
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