सिगरेट नहीं मिलेगी तो क्या, बीड़ी मिलेगी ना! जेल के अंदर जब अधिकारियों ने तोड़ने की कोशिश की, तब संजय दत्त ने ऐसे दिया था करारा जवाब! सुनील दत्त की आंखों में आंसू और 24 साल का लंबा दर्द, संजय दत्त ने खोले अपनी जिंदगी के कई दर्दनाक राज।

जेल प्रशासन ने उन्हें तोड़ने की पूरी कोशिश की थी

बता दें, बॉलीवुड के 'खलनायक' संजय दत्त ने हाल ही में शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टुनाइट' में अपनी जिंदगी के सबसे कठिन और काले दौर यानी जेल के दिनों से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। साल 1993 के मुंबई ब्लास्ट केस और आर्म्स एक्ट के तहत गैर-कानूनी हथियार रखने के मामले में 5 साल की सजा काटने वाले संजय ने बताया कि कैसे जेल प्रशासन ने उन्हें तोड़ने की पूरी कोशिश की थी।

'तुम्हें यहां कोई सिगरेट नहीं मिलने वाली, अब क्या करोगे?'

संजय ने यह भी खुलासा किया कि अधिकारियों को लगता था कि एक सेलिब्रिटी का रुतबा और सुख-सुविधाएं छीन लेने से वह अंदर से टूट जाएंगे। अधिकारियों ने उनका मजाक उड़ाते हुए कहा था, तुम्हें यहां कोई सिगरेट नहीं मिलने वाली, अब क्या करोगे? इस पर संजय ने बेबाकी से जवाब दिया था, सर, यहां बीड़ी तो मिलेगी ना। उनके इस जमीन से जुड़े और बेपरवाह अंदाज को देखकर अधिकारी खुद सदमे में आ गए थे, कि कोई कैदी इतनी आसानी से इन हालात को कैसे झेल सकता है।

पिता की आंखों में आंसू देख टूट चुके थे संजय दत्त

इंटरव्यू के दौरान जब शेखर सुमन ने पूछा कि क्या कभी अंडा सेल में रहने के दौरान उनके मन में सुसाइड का ख्याल आया, तो संजय ने साफ इनकार किया... हालांकि, वह उस दर्दनाक पल को आज भी नहीं भूल पाए हैं। जब उनके पिता और दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त के सामने उन्हें पहली बार हथकड़ी पहनाई गई थी। पिता की आंखों में आंसू देख संजय अंदर से टूट चुके थे। लेकिन पिता को संभालने के लिए उन्होंने खुद को चट्टान की तरह मजबूत रखा।

'स्टारडम का घमंड नहीं रहा'

संजय ने यह भी कहा कि उन्हें कभी अपने स्टारडम का घमंड नहीं रहा। वह कई बार सेट पर जमीन पर बैठकर वर्कर्स के साथ खाना खा चुके हैं। और यही सादगी जेल के मुश्किल दिनों में उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी

13 साल तक चली सुनवाई

बताते करीब 13 साल तक चली सुनवाई के बाद नवंबर 2006 में TADA कोर्ट ने संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया, लेकिन उन्हें TADA के तहत आतंकवादी साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया। यानी अदालत ने यह नहीं माना कि वह 1993 के मुंबई धमाकों की साजिश का हिस्सा थे। 2007 में उन्हें 6 साल की सजा सुनाई गई।

अच्छे व्यवहार के आधार पर हुई थी रिहाई

21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आर्म्स एक्ट वाली सजा को बरकरार रखा। लेकिन सजा को 6 साल से घटाकर 5 साल कर दिया। हालांकि संजय दत्त पहले ही लगभग 18 महीने जेल में रह चुके थे, उन्हें बाकी अवधि जेल में बितानी थी। इसके बाद उन्होंने 16 मई 2013 को सरेंडर किया और पुणे की यरवडा जेल भेजे गए। फरवरी 2016 में अच्छे व्यवहार आदि के आधार पर उनकी सजा पूरी होने से कुछ महीने पहले रिहाई हुई।

संजय दत्त की फिल्मी करियर

वहीं संजय दत्त की फिल्मी करियर की बात करें तो, संजय दत्त ने साल 1981 में फिल्म 'रॉकी' से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की, जो सुपरहिट रही..... 80 और 90 के दशक में उन्होंने 'थानेदार', 'साजन', और 'खलनायक' जैसी बेहतरीन फिल्मों से खुद को साबित किया। हालांकि साल 1993 में कानूनी मुकदमों के चलते उनके करियर को बड़ा झटका लगा....लेकिन उन्होंने 'वास्तव' और 'मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.' जैसी फिल्मों से शानदार वापसी की


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