ShareMarket : शेयर बाजार का हाल इस समय कुछ ऐसा चल रहा है जैसे समंदर में तेज हवाओं के बीच अपनी नौका को भगवान भरोसे छोड़ना। ठीक ऐसी ही स्थिति इस शेयर बाजार में मुनाफे को लेकर इन्वेस्टर्स की बनी हुई है। शेयर बाजार में इन्वेस्टर्स अपना हर कदम फूंक-फूंककर रख रहे हैं। बीते 2 से 3 साल में शेयर बाजार की हालत भी भगवान भरोसे चल रही है। इसे लेकर गल्फ देशों के बीच चल रहे विवाद का भी असर माना जा रहा है। ज्यादा इन्वेस्ट कर कम मुनाफा होना यह पिछले 3 सालों में भारत के बदलते हालात पर देखा गया है।

15-20% रिटर्न के लिए समझिए खेल


शेयर बाजार का इंडेक्स कभी लाल तो कभी हरे निशान को पार करके धड़ाम हो जाता है। लेकिन समय समंदर में लहरे शांत है। एक दौर ऐसा था कि इंडेक्स फंड या ईटीएफ की खोलकर आगे बढ़ाने का काम करना। लहरें अपने-आप 15-20% रिटर्न के किनारे तक आपको पहुंचा देती थीं। पैसा बनाना बस स्क्रीन पर 'इंडेक्स बाय' दबाने का खेल है। लेकिन अब समंदर शांत है।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे बयां कर रहे अलग सच्चाई


शेयर बाजार की में निफ्टी की हालत 23,900 से 24,750 के बीच ही चल रही है। जियोपॉलिटिकल तनाव और क्रूड में झटकों ने अपना पहिया घुमाया है। लेकिन निफ्टी की गाड़ी अभी तक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों ने जो कहानी बयां कि है वह बिलकुल असमान्य है। अगर घाटे में डूबी सरकारी तेल विपणन कंपनियों को किनारे कर दिया जाए तो, निफ्टी-500 कंपनियों की शुद्ध कमाई 23 फीसदी को पार लगाकर 2 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा देगा।

खुद करनी होगी मेहनत

ऐसे में कहा जा सकता है कि समंदर में इंडेक्स भले ही इस समय थमा हुआ है लेकिन समंदर में जैसे ही पानी की लहरों में ज्वार आएगा वैसे ही लहरें अपना कमाल दिखाकर ऊपर उछाल मारेगी। इन्वेस्टर्स कुछ यूं समझ सकते हैं कि अब बात पहले वाली नहीं रही। समंदर में अगर नाव उतारी है तो हवा के रुख का इंतजार करना गलत है। पैसिव ईटीएफ के लिए खुद हाथ से चप्पू चलाकर एक्टिव स्टॉक-पिकिंग और सेक्टर रोटेशन के हिसाब से मोती बटौरने होंगे।

अब शेयर चुनने का है दौर

दरअसल अभी तक 2 सालों में इन्वेस्टर्स को यही लोभ था कि निफ्टी 50 या निफ्टी नेक्सट 50 का ईटीएफ खरीद लिया जाए तो रिटर्न खुद बन जाएगा। लेकिन यह केवल सीमित दायरे वाले बाजार में पैसिव स्ट्रैटेजी का रिटर्न फ्लैट माना जाएगा। इस समय एक्टिव स्ट्रैटेजी को देखा जाए तो विभिन्न सेक्टरों के बीच का अंतर ऐतिहासिक लेवल पर है। बैंकिंग, मेटल्स और टेलीकॉम ने दोहरे अंकों में मुनाफा दर्ज किया है। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने अकेले हेडलाइन इंडेक्स के मुनाफे का निचोड़ इन्वेस्टर्स के सामने रखा है। जब इंडेक्स के भीतर कुछ दिग्गज शेयर नीचे लाल निशान पर जा रहे थे तो, बाकी शेयर रॉकेट बनकर हरियाली ला रहे थे। ऐसे में केवल एक्टिव स्टॉक-पिकिंग रणनीति ही आपके पोर्टफोलियो को इंडेक्स से बेहतर रिटर्न दिला सकती है।

पैसा लगाने से पहली तिमाही में लीडर कौन?

BSFE : क्रेडिट ग्रोथ 17% के मजबूत स्तर पर सरकारी बैंकों और NBFC ने एसेट क्वालिटी में सुधार के दम पर लीड किया।

मेटल्स और माइनिंग: लगातार चौथी तिमाही में बेहतरीन प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है। वैश्विक कीमतों में स्थिरता और मजबूत घरेलू मांग से मुनाफे में भारी उछाल।

टेलीकॉम: टैरिफ बढ़ोतरी और डाटा खपत से एवरेज रेवेन्यू पर यूजर सुधरा, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन में ठोस उछाल।

ऑटो व कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी: पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और ट्रैक्टर्स की मजबूत मांग के दम पर घरेलू खपत का पहिया तेजी से घूमा।

केमिकल्स व इंडस्ट्रियल्स: वायर्स, केबल्स और कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की भारी सरकारी व निजी मांग से टॉप-लाइन और बॉटम-लाइन दोनों में जोरदार तेजी।

दबाव झेलने वाले सेक्टर्स: इनमें पश्चिम एशिया संकट के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियां सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा सीमेंट, एविएशन और फार्मा सेक्टर भी भारी दबाव में हैं।

 

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