नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI की Monetary Policy Committee (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट बढ़ाया है। खास बात यह है कि MPC ने ब्याज दर बढ़ाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी पॉलिसी स्टांस को ‘Neutral’ से बदलकर ‘Calibrated Tightening’ कर दिया है। 

अब सबसे बड़ा सवाल है कि RBI ने अचानक ब्याज दर क्यों बढ़ाई, इसका आपकी EMI और लोन पर क्या असर होगा और क्या दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ सकता है?

पहले समझिए Repo Rate क्या होता है

Repo Rate वह ब्याज दर है जिस पर RBI दूसरे बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा उधार देता है। जब RBI इस दर को बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है। इसका असर धीरे-धीरे बैंक के लोन की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है।

यानी रेपो रेट बढ़ने का सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में कुछ तरह के लोन महंगे हो सकते हैं। वहीं, दूसरी तरफ बैंक और NBFC अपनी जमा योजनाओं यानी FD पर ब्याज बढ़ा सकते हैं, जिससे बचत करने वालों को फायदा मिल सकता है।

RBI ने Repo Rate क्यों बढ़ाया?

इस फैसले की सबसे बड़ी वजह महंगाई का बढ़ता दबाव है। अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.82 फीसदी रही, जो RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर थी। RBI ने FY27 के लिए अपने inflation forecast को भी बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। 

महंगाई पर सिर्फ घरेलू कारणों का असर नहीं है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, food prices, commodity prices और वैश्विक बाजार में जारी अनिश्चितता भी RBI की चिंता बढ़ा रही हैं। कमजोर मानसून से आने वाले समय में खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ने का जोखिम भी है।

क्या आपकी EMI तुरंत बढ़ जाएगी?

रेपो रेट बढ़ने के बाद हर लोन की EMI तुरंत और एक जैसी नहीं बढ़ती। इसका असर आपके लोन के प्रकार, ब्याज दर और बैंक की रीसेट पॉलिसी पर निर्भर करता है।

खासकर floating-rate home loan, personal loan और vehicle loan लेने वाले ग्राहकों पर इसका असर पड़ सकता है। अगर बैंक अपनी lending rate बढ़ाते हैं तो मौजूदा borrowers के लिए EMI बढ़ सकती है या फिर लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 25 bps की बढ़ोतरी के साथ हर व्यक्ति की EMI ठीक 25 bps के हिसाब से बढ़ जाएगी। वास्तविक असर बैंक और आपके loan agreement पर निर्भर करेगा।

FD वालों के लिए क्या बदलेगा?

रेपो रेट बढ़ने का एक दूसरा पहलू depositors से जुड़ा है। बैंक अगर lending rates बढ़ाते हैं तो जमा पर ब्याज दरों में भी बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में FD में पैसा रखने वालों को आने वाले समय में बेहतर interest rate मिलने की संभावना बन सकती है।

कुछ NBFC ने RBI के फैसले के बाद अपनी FD rates में बदलाव भी किया है। उदाहरण के तौर पर Bajaj Finance ने 7 अक्टूबर से कुछ tenure वाली fixed deposits पर 15 से 40 basis points तक बढ़ोतरी की है। 

क्या दिसंबर में फिर बढ़ेगा Repo Rate?

अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल पर है। RBI ने अपनी policy stance को ‘calibrated tightening’ किया है। इसका मतलब यह है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल rate cut की दिशा में नहीं है और आगे का फैसला महंगाई तथा आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर hike या pause में से हो सकता है। 

CRISIL की Principal Economist Dipti Deshpande के मुताबिक retail inflation हाल के महीनों में बढ़ी है और crude oil, commodities तथा food prices से जुड़े risks भी ज्यादा स्पष्ट हुए हैं। उन्होंने दिसंबर में एक और 25 basis points की rate hike की गुंजाइश बताई है। 

वहीं कुछ अन्य economists ने आने वाले महीनों में कुल 50-75 basis points तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई है। हालांकि यह कोई तय फैसला नहीं है। RBI ने साफ संकेत दिया है कि आगे की कार्रवाई inflation और growth के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। 

Economy की Growth कैसी है?

दिलचस्प बात यह है कि RBI ने ब्याज दर बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास के अनुमान को भी मजबूत किया है। केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए GDP growth forecast को 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है। अप्रैल-जून तिमाही में GDP growth 7.8 फीसदी रही थी। 

यानी RBI के सामने इस समय दो बड़ी तस्वीरें हैं—एक तरफ economy की growth मजबूत है और दूसरी तरफ inflation का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में केंद्रीय बैंक का फोकस growth को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना inflation को काबू में रखने पर है।

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

Repo Rate में बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर borrowers पर देखने को मिल सकता है। अगर बैंक lending rates बढ़ाते हैं तो नया home loan, car loan या personal loan महंगा हो सकता है। Existing floating-rate borrowers की EMI या repayment period भी बढ़ सकती है।

दूसरी तरफ FD और अन्य fixed-income products में पैसा रखने वालों के लिए बढ़ती ब्याज दरें फायदेमंद हो सकती हैं।

कुल मिलाकर RBI का यह फैसला सिर्फ ब्याज दर बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह संकेत देता है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक का फोकस महंगाई पर ज्यादा सख्ती करने पर है। अब आने वाले महीनों में crude oil, food prices, inflation और global economic conditions यह तय करेंगे कि दिसंबर में RBI एक और rate hike करता है या मौजूदा 5.50 फीसदी पर ही रुक जाता है।

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