दिल्ली: भारत में जल्द ही पॉलीमर यानी प्लास्टिक करेंसी को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहयोगी कंपनी ने पॉलीमर सब्सट्रेट से बनने वाले बैंक नोटों के लिए प्रक्रिया शुरू की है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि ये नोट आखिर कैसे होंगे और क्या इन्हें बनाने में जानवरों से मिलने वाली चर्बी का इस्तेमाल किया जाएगा?

कागज के बजाय पॉलीमर से बनेंगे नोट
पॉलीमर नोट देखने में सामान्य बैंक नोट जैसे ही होंगे, लेकिन इन्हें पारंपरिक कागज की जगह खास तरह के पॉलीमर सब्सट्रेट से तैयार किया जाएगा। ये सामग्री ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होती है। पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके पानी और नमी से खराब होने की संभावना कागजी नोटों की तुलना में कम होती है। इससे नोटों की उम्र बढ़ सकती है और उन्हें बार-बार बदलने की जरूरत भी कम हो सकती है।

क्या प्लास्टिक नोट में होगी जानवरों की चर्बी?
यही सवाल इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है। दरअसल, कुछ देशों में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर बैंक नोटों की सामग्री को लेकर Animal Tallow यानी जानवरों से प्राप्त चर्बी के इस्तेमाल का मुद्दा सामने आ चुका है। लेकिन भारत के मामले में RBI ने इसको लेकर पहले ही स्पष्ट शर्त रखी है।

RBI ने रखी साफ शर्त
पॉलीमर सब्सट्रेट की सप्लाई करने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत के लिए तैयार की जाने वाली सामग्री में Animal Tallow या उसका DNA मौजूद नहीं हो। यानी भारत में तैयार होने वाले पॉलीमर नोटों को लेकर जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल की आशंका को दूर करने के लिए सप्लायर से बाकायदा प्रमाण मांगा जाएगा।

नकली नोटों पर भी लगेगी लगाम
पॉलीमर नोटों का एक बड़ा फायदा उनकी सुरक्षा भी हो सकता है। इनमें ऐसे आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें नकली नोट बनाने वालों के लिए कॉपी करना मुश्किल होगा। इसके अलावा पॉलीमर सामग्री नोट को ज्यादा मजबूत बनाएगी। जेब, पर्स या बारिश में नोट के जल्दी खराब होने की समस्या भी कम हो सकती है।

क्या बंद हो जाएंगे कागज के पुराने नोट?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। पॉलीमर नोटों को लेकर प्रक्रिया और परीक्षण की बात सामने आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश में चल रहे सभी कागजी नोट अचानक बंद कर दिए जाएंगे। अगर भारत में पॉलीमर करेंसी लागू होती है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से लाया जा सकता है।